नई दिल्ली : भारत जनसंख्या के मामले में चीन को पीछे छोड़ दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाला देश बन गया है. बढ़ती आबादी के अपने फायदे-नुकसान हैं. अधिक आबादी से आर्थिक स्थिति बनी रहती हैं, वहीं कम आबादी को कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है. साइंस अलर्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इंसान की संख्या धरती पर 800 करोड़ पार कर गई है. 100 करोड़ से 200 करोड़ होने में 125 साल लगा था, जबकि 700 करोड़ की जनसंख्या मात्र 12 साल में हो गया. जिस तेजी से जनसंख्या बढ़ रही है, अगर दुनिया भर के देश ग्लोबल वार्मिंग पर काबू नहीं पा लेते हैं तो इंसानों की आबादी धीरे-धीरे खत्म होनी शुरू हो जाएगी।

रिपोर्ट में हुआ खुलासा

UN DESA की वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉसपेक्ट्स 2022 रिपोर्ट के मुताबिक, 2037 तक इंसानों की आबादी 900 करोड़ तथा 2058 तक 1,000 करोड़ पार कर जाएगी. साइंटिस्ट और Earth4All के मॉडलर जोर्जन रैंडर्स का कहना है कि जहां जनसंख्या बढ़ रही है, वहां पर प्रति व्यक्ति पर्यावरणीय फुटप्रिंट्स कम हो रहे हैं. कुछ देश ऐसे हैं, जहां नियम से तेज आबादी बढ़ रही है. स्टडी के मुताबिक, सबसे अधिक जनसंख्या अंगोला, कॉन्गो, नाइजीरिया और नाइगर जैसे अफ्रीकी देशों में बढ़ रही है. एशियाई देशों की बात करें तो अफगानिस्तान में लिस्ट में टॉप पर है.

इंसान पर खतरा

बढ़ती जनसंख्या के वजह से होगा वैश्विक असंतुलन. वाइल्डलाइफ का विलुप्त होना आगे चलकर आर्थिक स्थिति के साथ आबादी को भी बुरी तरह से प्रभावित करेगा. सबसे अच्छी स्थिति जायंट लीप (Giant Leap) मानी जा रही है. यानी 2040 तक आबादी 850 करोड़ हो जाएगी. लेकिन, 2100 तक यह घटकर 600 करोड़ हो जाएगी. यानि भारी तबाही इस बीच देखने को मिल सकती है, जिसमें लाखों लोगों की जान जाएगी. UN की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2050 तक इथियोपिया, भारत, नाइजीरिया, कॉन्गो, मिस्र, पाकिस्तान, फिलिपींस और तंजानिया में जनसंख्या सबसे तेज गति से बढ़ेगी.

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