धनबाद DC आदित्य रंजन पर उठा सवाल: दो पदों पर एक साथ तैनाती को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर बाबूलाल मरांडी का निशाना, पूछा…
Question raised on Dhanbad DC Aditya Ranjan: Babulal Marandi targeted the government's functioning regarding the simultaneous deployment on two posts, asked...

Babulal Marandi On IAS Aditya Ranjan: धनबाद के उपायुक्त (DC) और साथ ही IT निदेशक के पद पर पिछले पाँच महीनों से एक साथ तैनात आईएएस अधिकारी आदित्य रंजन को लेकर विवाद गहरा गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने इसे प्रशासनिक अनियमितता, सत्ता संरक्षण और पदों के दुरुपयोग का मामला बताते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जवाब मांगा है।
इस बयान के बाद झारखंड में एक बार फिर प्रशासनिक नियुक्तियों की पारदर्शिता को लेकर विवाद गहरा गया है। भाजपा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि राज्य सरकार, विशेष अधिकारियों को संरक्षण देने और पदों पर मनचाही तैनाती बनाए रखने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था का दुरुपयोग कर रही है।
विवाद का केंद्र आईएएस अधिकारी आदित्य रंजन हैं, जो फिलहाल धनबाद के उपायुक्त (DC) पद पर तैनात हैं, लेकिन आरोप है कि तबादला हो जाने के बावजूद वे पिछले पाँच महीनों से IT निदेशक के पद पर भी बने हुए हैं। एक अधिकारी का दो महत्वपूर्ण पदों पर एक साथ कार्यरत रहना अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
विपक्ष ने लगाया गंभीर आरोप
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर तंज कसते हुए इसे “प्रशासनिक नैतिकता का उल्लंघन” बताया है। उनका कहना है कि राज्य में पहले भी वरिष्ठ अधिकारियों को बचाने और मनचाहे पदों पर बनाए रखने के लिए ट्रांसफर-पोस्टिंग प्रक्रिया प्रभावित की गई है।
मरांडी ने आरोप है कि यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने नियुक्ति एवं पदस्थापना प्रणाली को प्रभावित किया हो। इससे पहले भी एसपी या आईपीएस अधिकारियों के प्रमोशन और तबादलों पर सवाल उठ चुके हैं।
नेताओं का कहना है कि यदि राजधानी रांची में आईटी निदेशक के रूप में कार्य करने के लिए कोई अन्य योग्य अधिकारी उपलब्ध नहीं है, तो यह प्रशासनिक क्षमता पर प्रश्नचिह्न है। वहीं, यदि अधिकारी को “विशेष संरक्षण” के तहत दोहरी जिम्मेदारी दी गई है, तो इस निर्णय की पारदर्शिता की जांच आवश्यक है।
सरकार की चुप्पी से बढ़े सवाल
मामले पर सरकार या विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विपक्ष ने मांग की है कि सरकार स्पष्ट करे—
• एक अधिकारी दो पदों पर क्यों तैनात है?
• क्या यह नियमों और सेवा शर्तों का उल्लंघन है?
• ऐसे निर्णय का आधार और प्रशासनिक औचित्य क्या है?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में राज्य कार्मिक विभाग का स्पष्ट आदेश सामने आने के बाद ही संपूर्ण तथ्य स्पष्ट होंगे।
प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही की मांग
विपक्ष ने सरकार से मांग की है कि पदस्थापना प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही, यह भी पूछा जा रहा है कि यदि अधिकारी का तबादला हो चुका था, तो वे अभी तक आईटी निदेशक पद पर कैसे बने हुए हैं और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।









