कुदरत का कहर या सिस्टम की लापरवाही? मौत बनकर गिरी बारिश…तीन दिनों में 7 किसानों की मौत…सरकार पर उठे गंभीर सवाल..

हैदराबाद: तेलंगाना के मंचरियाल जिले में मंगलवार शाम ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। अचानक बदले मौसम, तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश ने देखते ही देखते तबाही मचा दी। खरीद केंद्रों पर खड़े किसानों को संभलने का मौका भी नहीं मिला और दीवारें भरभराकर गिर पड़ीं। इस भयावह हादसे में 4 किसानों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बारिश इतनी तेज थी कि कुछ ही मिनटों में हालात बेकाबू हो गए। किसान अपनी फसल बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे, तभी अचानक दीवार गिरने की जोरदार आवाज आई और चीख-पुकार मच गई। जब तक लोग कुछ समझ पाते, तब तक चार जिंदगियां मलबे के नीचे दम तोड़ चुकी थीं।
इस दर्दनाक घटना पर भारत राष्ट्र समिति के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामाराव ने गहरी संवेदना जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि प्रतिकूल मौसम के बीच खरीद केंद्रों की बदहाल स्थिति ने किसानों की जान ले ली। उन्होंने मृतकों के परिवारों के लिए 25 लाख रुपये मुआवजे और घायलों के लिए बेहतर इलाज की मांग की है।
केटीआर ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महीनों की कड़ी मेहनत के बाद तैयार फसल की समय पर खरीद न होने के कारण किसान मजबूर होकर इन केंद्रों पर डटे रहे। इसी लापरवाही ने उन्हें मौत के मुंह में धकेल दिया। उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन दिनों में अलग-अलग घटनाओं में 7 किसानों की जान जा चुकी है।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि राज्य के सभी थ्रेशिंग यार्ड और खरीद केंद्रों पर पड़ी फसलों की तत्काल खरीद सुनिश्चित की जाए, ताकि ऐसे खतरनाक हालात दोबारा पैदा न हों।
इस हादसे ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ये सिर्फ प्राकृतिक आपदा थी या फिर सिस्टम की अनदेखी ने इसे जानलेवा बना दिया? फिलहाल, गांवों में मातम पसरा है और हर किसी के मन में यही डर है कि अगला नंबर किसका होगा।









