अंधेरे में मौत की डिलीवरी! न जनरेटर चला..न बैकअप मिला…मोबाइल टॉर्च की रोशनी में जन्म से पहले ही बुझ गई दो जिंदगियां….झारखंड के CHC में भयावह लापरवाही

जांच के बाद कई बड़े सवाल खड़े

सरायकेला-खरसावां:
झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की ऐसी डरावनी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में प्रसव के दौरान बिजली गुल हो गई, और आरोप है कि डॉक्टरों ने मोबाइल टॉर्च की रोशनी में डिलीवरी कराने की कोशिश की। लेकिन इस कोशिश ने एक मां और उसके नवजात की जान ले ली।


अंधेरे में जिंदगी की जंग, लेकिन हार गई मां-बच्चा
बताया जा रहा है कि प्रसव के दौरान अचानक अस्पताल की बिजली चली गई। हैरानी की बात यह है कि उस वक्त अस्पताल में न तो जनरेटर चालू किया गया और न ही कोई अन्य पावर बैकअप उपलब्ध कराया जा सका। ऐसे में डॉक्टरों ने मोबाइल की रोशनी में ही डिलीवरी कराने की कोशिश की, जो आखिरकार जानलेवा साबित हुई।

मृतक महिला की पहचान हाथीसिरिंग गांव निवासी बिनीता बानरा के रूप में हुई है, जो खुद स्वास्थ्य सहिया के तौर पर काम करती थीं। इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है।


जनरेटर, सोलर… सब था, फिर भी अंधेरा क्यों?
घटना के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और तुरंत जांच के आदेश दिए गए। प्रारंभिक जांच में सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि जब अस्पताल में सोलर सिस्टम, इन्वर्टर और जनरेटर मौजूद थे, तो उनका इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया?

जांच के दौरान पूर्व चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अर्जुन सोरेन ने बताया कि घटना की रात सोलर बैटरी चार्ज नहीं थी और लंबे समय से जनरेटर का इस्तेमाल नहीं होने के कारण वह खराब हालत में था। इस पर प्रशासन ने कड़ी नाराजगी जताई और इसे गंभीर लापरवाही माना।


परिजनों का गुस्सा, कार्रवाई की मांग तेज
घटना के बाद मृतका के परिजनों में भारी आक्रोश है। उनका आरोप है कि अगर समय पर सही व्यवस्था होती तो मां और बच्चे की जान बच सकती थी। उन्होंने डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।


स्वास्थ्य मंत्री सख्त, डॉक्टर सस्पेंड करने के निर्देश
मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने घटना पर दुख जताते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और प्रभारी चिकित्सक को सस्पेंड करने को कहा है।

वहीं, विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह चरमराया हुआ बताया है। आरोप है कि ग्रामीण इलाकों में लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जो सिस्टम की बड़ी नाकामी को उजागर करती हैं।


जांच शुरू, जवाबदेही तय होने का इंतजार
उपायुक्त के निर्देश पर गठित जांच कमेटी ने एसडीओ अभिनव प्रकाश के नेतृत्व में अस्पताल पहुंचकर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना की रात की परिस्थितियों को खंगाला जा रहा है और जिम्मेदारों से जवाब-तलब किया जा रहा है।


सवाल जो डराते हैं…
एक अस्पताल, जहां जिंदगी बचाने की उम्मीद होती है, वहां अगर अंधेरे में इलाज हो और सिस्टम ही साथ छोड़ दे—तो आखिर जिम्मेदार कौन?
यह घटना सिर्फ एक लापरवाही नहीं, बल्कि उस सच्चाई का आईना है, जहां कभी-कभी इलाज से ज्यादा डरावना हो जाता है खुद अस्पताल का माहौल।

Related Articles

close