गोविंदपुर(धनबाद) ।…..मां अभी ड्यूटी पर हूं, बाद में कॉल करता हूं !…पर, क्या मालूम था…जवान की इस मां के लिए ये कभी नहीं खत्म होने वाला इंतजार हो जायेगा। ..मां ने हर दिन की तरह रविवार को भी त्रिपुरा में तैनात BSF जवान अपने बेटे रविशंकर को कॉल किया था, सुबह के करीब 10 बजकर 10 मिनट हुए थे। हर दिन तकरीबन यही वक्त होता था, जब मां रवि को फोन करती और उसका हाल पूछती..। ना जाने सुबह से ही मां का दिल थोड़ा बैचेन था, अनजाने से डर के बीच मां ने फोन कर पूछा,…रवि, सब ठीक तो है, सुबह कुछ खाया या नहीं बेटा….सामने से रवि बोला, हां, मां सब ठीक है, पर अभी ड्यूटी में हूं, जरूरी काम है, बाद में कॉल करता हूं। मां और बातें करना चाहती थी…लेकिन हड़बड़ी में रवि ने फोन कट किया तो मां का दिल बैठ सा गया। बेटे के फोन रखते-रखते मां बोली, ठीक है बेटा, फ्री होकर फोन करना…..पर क्या मालूम था, अब उस जिगर के टुकड़े का कभी कॉल नहीं आयेगा….हमेशा मां प्रणाम, से अपनी बातों की शुरुआत करने वाला रविशंकर अब नहीं पूछेगा, मां तेरी तबीयत तो ठीक है ना, कुछ खाया की नहीं.. पापा स्कूल चले गये क्या…बाबू सब क्या कर रहा है….।

मां से बात किये अभी 1 घंटा ही गुजरा था, कि 11.25 बजे लैंड लाइन नंबर से आये फोन कॉल से पिता रामदेव साव का मोबाइल घनघना उठा। पिता ने घबराते हुए मोबाइल पर हैलो बोला….तो सामने से आवाज आयी !…मैं गोकुल नगर से BSF कमांडेंट बोल रहा हूं, क्या आप रविशंकर साव के पिता बोल रहे हैं..। रामदेव साव के जवाब में हां, बोलते ही…BSF की तरफ से सूचना दी गयी, अपनी ड्यूटी निभाते-निभाते रविशंकर हादसे का शिकार हो गया है, उसे हास्पीटल ले जाया गया है, लेकिन वो रिकवर नहीं हो पाया है। इतना कहकर फोन सामने से कट हो गया।

कोई पिता कितना भी कड़क क्यों ना हो, जब उसके लाल के हादसे की खबर मिलती है तो पत्थर दिल बाप भी मोम बन जाता है। पिता अपने जांबाज बेटे का हर हाल जानने के लिए बैचेन हो उठा, कभी हेडक्वार्टर फोन लगाता, तो कभी अधिकारियों को नंबर ढूंढकर फोन मिलाता, जैसे-तैसे रविशंकर के कुछ जवान साथियों का नंबर मिला तो पिता ने अपने बेटे का हाल पूछा, तो खबर मिली, रविशंकर शहीद हो गया है। दोपहर के 2 बजे शहादत की खबर सुनते ही पिता रामदेव चित्कार कर उठे…मां बदहवास हो गयी…उधर, पत्नी बेहोश होकर निढाल पड़ गयी। यकीन कर पाना मुश्किल था, जिस जांबाज बेटे से 1 घंटे पहले बात हुई थी, अब वो इस दुनिया में नहीं रहा।

2012 में बीएसएफ ज्वाइन कर देश सेवा में लगने वाले रविशंकर सिर्फ घर में मां-पिता का चहेता नहीं था, यारों का भी यार था। तभी तो जैसे ही रविशंकर की शहादत की खबर आयी, दूर दराज से उसके दोस्त भी एक झलक पाने के लिए पहुंच गये।

रविवार की दोपहर हादसे में प्राणों की आहुति देने वाले धनबाद के इस लाल का शव मंगलवार की सुबह सेना की गाड़ी से घर लाया गया तो सभी की आंखें नम हो गयी। कौन था जो रो नहीं रहा था…कौन था, जिसकी आंखें नम नहीं था….कौन था, जो इस जांबाज लाल की एक झलक को बेताब नहीं था…..पिता रामदेव बिलख-बिलख के कभी शहीद बेटे का शव देखते, तो कभी जोर-जोर से भारत माता की जय के नारे लगाने लगते। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि बेटे के शव पर चित्कार करें या फिर शेरदिल पिता की तरह अपने बेटे को आखिरी विदाई दें। बदहवास मां तो ताबूत ऐसी लिपटी, मानों आज जिंदगी भर का प्यार लुटाना चाह रही हो…। पर फर्क ये था कि आज मां अपने बेटे को बांहों में भरकर दुलार करना चाह रही थी, और बेटा था कि खामोश सोया था। बिलखती मां यही बार-बार दोहरा रही थी,…उठ ना बेटा…उठ ना…एक बार तो उठ बेटा… ये क्या कर दिया बेटा…देख ना एक बार बात तो कर…। उधर, पत्नी की आंखे तो मानों पथरा सी गयी थी, कभी खामोशी से टकटकी बांधे शहीद पति का शव देखती, तो कभी कलेजा फट जाने वाली चित्कार से भर उठती। 8 साल और 6 साल के दोनों बेटे तो जान थे रवि के…जब भी छुट्टी पर आता किसी के लिए कुछ ना लाये तो पर दोनों बच्चों के लिए कभी खाली हाथ नहीं आता। पिछले महीने 15 मई को तो छुट्टी से लौटा था रवि, सभी को बोलकर अब नवंबर-दिसंबर में आऊंगा। मां ने कहा- बहुत कम दिन रूका इस बार, तो बोला अगली बार छुट्टी लंबी लेकर आऊंगा। अपना कहा वादा तो निभाया, पर इतनी भी लंबी छुट्टी लेकर क्या आना, जिसका अब कभी अंत नहीं होगा। पिता के शव को देख दोनों बच्चों को समझ नहीं आ रहा था। पिता रामदेव को ये मालूम था कि जाते वक्त रवि को किसी का भी रोना पसंद नहीं, वो अपनी मां-पिता और बच्चों को भी बोलता था, मुझे रोते हुए कभी विदा मत करना….कोई रोता तो तुरंत बोलता… मत रो ना…ऐसे जाना ठीक लगता है क्या…। लेकिन आज तो पूरा जमाना रो रहा था…रामदेव इसलिए खुद तो रो रहे थे, लेकिन दूसरों को बोलते चुप हो जा…बेटा शहीद हुआ है, देश का नाम ऊंचा करके विदा हुआ है, शहीद के लिए सब कोई नारा लगाओ। मंगलवार सुबह शव पहुंचते ही पूरा हिंद नगर मानों गम के सैलाब में डूब गया था। रविवार जब से रवि की शहादत की खबर मिली, तभी से कई घरों में चुल्हा नहीं जला था।

आज सुबह जब कोयलाचंल का लाल अपने अंतिम सफर पर निकला तो लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। तिरंगे में लिपटा जवान का ताबूत सेना की गाड़ी में आगे-आगे और…पीछे-पीछे पूरा सैलाब चल रहा था। …जब तक सूरज चांद रहेगा, रविशंकर का नाम रहेगा….शहीद रविशंकर अमर रहे…के नारों से पूरा आसमान गूंज रहा था। लोगों की भीड़ इतनी कि श्मशान घाट के 20 मिनट का सफर 2 घंटे से ज्यादा वक्त में भी तय नहीं हो सका। शहीद रविशंकर को उनके बड़े बेटे ने मुखाग्नी दी, तो मौजूद लोग का कलेजा मुंह को आ गया। एक फौजी के पिता का दिल कैसा होता ये रामदेव साव ने बता दिया। सामने शहीद की चिता सजी थी….और रामदेव साव कह रहे थे। मेरा एक बेटा शहीद हुआ तो क्या हुआ ? अपने दूसरे बेटे, बहू, पोता सभी को देश सेवा में भेज सकता हूं। मेरा बेटा गया, अब मेरा पोता देश सेवा में जायेगा, मेरा बेटा देश का कर्ज चुकाते हुए शहीद हुआ है, हमें अपने बेटे पर नाज है।


धनबाद का सर ऊंचा कर झारखंड का लाल रविशंकर तो सितारों के पार चला गया। पर उसका बलिदान, शौर्य और साहस हमेशा जमाना याद रखेगा। वो आसमान से भी सूरज और चांद की तरह चमकते हुए ये अहसास करायेगा कि देश की इस मिट्टी में अगर फिर से जन्म लेने का सौभाग्य मिले, तो देश सेवा का मौका जरूर देना। शत-शत नमन रविशंकर…आपकी शहादत को HPBL न्यूज का सलाम।

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