अंधेरे में जन्मी जिंदगी, अस्पताल बना खौफ का मंजर: मोबाइल टॉर्च की रोशनी में करानी पड़ी डिलीवरी
Mungeli district के लोरमी स्थित सरकारी अस्पताल में बिजली गुल होते ही खुली सिस्टम की पोल, लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

मुंगेली:
छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। Mungeli district के लोरमी स्थित 50 बिस्तरों वाले मातृ-शिशु अस्पताल में जो हुआ, उसने इंसानियत और व्यवस्था दोनों को झकझोर कर रख दिया।
एक गर्भवती महिला को उस वक्त अपनी संतान को जन्म देना पड़ा, जब पूरा अस्पताल अंधेरे में डूबा हुआ था। हालात इतने खराब थे कि नर्सिंग स्टाफ को मोबाइल की टॉर्च जलाकर डिलीवरी करानी पड़ी।
राहत की बात सिर्फ इतनी रही कि मां और नवजात दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन इस घटना ने स्वास्थ्य तंत्र की बड़ी लापरवाही को उजागर कर दिया है।
बिजली गुल होते ही बढ़ा खतरा
पीड़ित महिला सोमवार को अपने पति के साथ अस्पताल पहुंची थी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन जैसे ही प्रसव प्रक्रिया शुरू हुई, अचानक बिजली चली गई।
बताया जा रहा है कि शॉर्ट सर्किट के कारण अस्पताल का पूरा सिस्टम ठप हो गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ऑटो-कट जनरेटर और इन्वर्टर भी ऐन वक्त पर फेल हो गए।
करीब आधे घंटे तक महिला प्रसव पीड़ा में तड़पती रही और अंत में नर्सों ने मोबाइल की टॉर्च के सहारे डिलीवरी कराई।
पति का गंभीर आरोप, स्टाफ का विवादित जवाब
महिला के पति हेमंत ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि घटना के समय वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।
जब उन्होंने स्टाफ से इस अव्यवस्था पर सवाल उठाया, तो कथित तौर पर उन्हें जवाब मिला— शिकायत करनी है तो कर दो, Arun Sao से कर दो।
इस बयान के सामने आने के बाद मामला और गरमा गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज
इस घटना पर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री T. S. Singh Deo ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने इसे सीधे तौर पर जान से खिलवाड़ बताते हुए कहा कि अगर इतने संवेदनशील समय पर जनरेटर और बैकअप सिस्टम काम नहीं कर रहे थे, तो यह बेहद गंभीर लापरवाही है।
उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की है।
प्रशासन की सफाई, लेकिन सवाल बरकरार
स्वास्थ्य विभाग और खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) ने इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा कि खराब मौसम के कारण तकनीकी खराबी आई थी, जिसे अब ठीक कर लिया गया है।
हालांकि, इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—जब करोड़ों रुपये खर्च कर अस्पताल बनाए जाते हैं, तो इमरजेंसी के समय बुनियादी बैकअप सिस्टम क्यों फेल हो जाते हैं?









