इंसानियत हुई शर्मसार! मां तड़पती रही सड़क पर, बेटा बचाने में जुटा… और शख्स बनाता रहा वीडियो
कानपुर का दिल दहला देने वाला वीडियो वायरल, मासूम की कोशिशों ने रुलाया, लोगों की संवेदनहीनता पर उठे सवाल

इंसानियत हुई शर्मसार! मां तड़पती रही सड़क पर, बेटा बचाने में जुटा… और शख्स बनाता रहा वीडियो
कानपुर से एक ऐसा मार्मिक वीडियो सामने आया है, जिसने इंसानियत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह वीडियो न सिर्फ दिल को झकझोर देता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे आज के दौर में लोग मदद करने के बजाय कैमरा उठाना ज्यादा जरूरी समझने लगे हैं।
वायरल वीडियो में एक गरीब महिला सड़क पर बेहोश पड़ी नजर आती है। बताया जा रहा है कि तेज गर्मी और धूप की वजह से वह अचानक बेहोश हो गई। सड़क की तपती गर्मी में बेसुध पड़ी मां को देख उसका छोटा सा बेटा, जिसकी उम्र करीब 8-9 साल बताई जा रही है, घबराहट में इधर-उधर दौड़ता दिखाई देता है।
सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आता है जब वह मासूम बच्चा नंगे पैर दौड़कर पानी लाता है और अपनी मां को होश में लाने की कोशिश करता है। वह बार-बार मां के चेहरे पर पानी डालता है, उसे उठाने की कोशिश करता है। बच्चे की आंखों में डर, चिंता और मां के लिए बेपनाह प्यार साफ झलकता है।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच जो बात सबसे ज्यादा चुभती है, वह यह है कि वहां मौजूद एक शख्स इस पूरी घटना का वीडियो बनाता रहा, लेकिन उसने मदद के लिए हाथ तक नहीं बढ़ाया। उसकी यह संवेदनहीनता अब सोशल मीडिया पर लोगों के गुस्से का कारण बन गई है।
Barefoot boy in Kanpur desperately tries to revive his unconscious mother on the roadside offering water & snacks while onlookers just film instead of helping.
— Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) April 3, 2026
वीडियो के आखिर में महिला को धीरे-धीरे होश आता है, जिसके बाद बच्चा राहत की सांस लेता है। यह पल जहां सुकून देता है, वहीं पूरे घटनाक्रम पर सोचने को भी मजबूर कर देता है।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होते ही यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। लोग वीडियो बनाने वाले शख्स की जमकर आलोचना कर रहे हैं और कह रहे हैं कि पहले मदद करना इंसानियत है, न कि वीडियो बनाना।
वहीं, मासूम बच्चे की बहादुरी और जिम्मेदारी की लोग दिल खोलकर तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि इतनी छोटी उम्र में उसने जो किया, वह बड़े-बड़ों के लिए एक सीख है।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या हम तकनीक के इस दौर में इंसानियत को पीछे छोड़ते जा रहे हैं, या अभी भी वक्त है खुद को बदलने का।









