सूर्य के कर्क राशि में पेश करने के दिन को ही कर्क संक्रांति कहा जाता है । इस दिन से सूर्य देव की 6 महीने के लिए दक्षिण यात्रा शुरू हो जाती है ,जिसे दक्षिणायन भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इन 6 महीने के चरण में भगवान की रात्र शुरू हो जाती है । इस दिन भक्तों के साथ भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और उपवास रखा जाता है इस दिन को देवशयनी एकादशी भी कहते हैं । मान्यता है कि इस दिन अन्न और वस्त्र दान करना अत्यंत फलदाई होता है । कर्क संक्रांति को श्रावण संक्रांति (shravan sankrati) भी कहते हैं ।सूर्य के दक्षिणायन होने से रात लंबी और दिन छोटे हो जाते हैं।

मानसून की शुरुआत का प्रतीक है सूर्य संक्रांति।

कर्क संक्रांति अर्थात मानसून के मौसम का शुरुआत होना । दक्षिणायन का समापन मकर संक्रांति के साथ होता है और उत्तरायण इसके बाद आता है ।दक्षिणायन के सभी 6 महने के दौरान लोग भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। जो लोग अपने पूर्वजों के लिए पितृ तर्पण करना चाहते हैं वे दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करने के लिए कर्क संक्रांति की प्रतीक्षा करते हैं ।

इस बार कर्क संक्रांति 16 जुलाई दिन शनिवार को पड़ रहा है ।

कर्क संक्रांति के नियम

  1. सभी तरह के पापों से मुक्ति के लिए कर्क संक्रांति के दिन भक्तों को सूर्योदय में पवित्र स्नान करना चाहिए।
  2. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और पूजा के दौरान विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का जाप किया जाता है । इससे भक्तों को शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  3. इस दिन विशेष रुप से ब्राह्मणों को अनाज ,वस्त्र आदि सभी प्रकार के दान करना चाहिए।
  4. कर्क संक्रांति पर भगवान विष्णु के साथ-साथ सूर्यदेव की भी पूजा की जाती है।
  5. इस दिन कुछ भी नया शुरू नही किया जाता है।
  6. ऐसा मान्यता है कि सूर्य के दक्षिणायन में जाने से नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव तेज हो जाता है और सकारात्मक शक्तियां कम हो जाती है।
  7. दक्षिणायन में पूजा-पाठ ,दान ,तप करने पर विशेष जोर दिया जाता है ।
  8. दक्षिणायन में देवता चुकी योग निद्रा में होते हैं, इसलिए विवाह ,मुंडन ,उपनयन संस्कार ,गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य करना वर्जित होता है ।
  9. दक्षिणायन के दौरान सूर्य कर्क ,सिंह ,कन्या ,तुला ,वृश्चिक और धनु राशि में गोचर करते हैं।

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