मुंबई 15 मई 2022। किसी के होठों पर चुंबन या शरीर के अंगों को प्यार से छूना अप्राकृतिक सेक्स नहीं है। बाम्बे हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ अप्राकृतिक यौन शोषण के मामले में जेल में बंद आरोपी को जमानत दे दी। अदालत ने जमानत देते वक्त कहा कि KISSING या FONDLING को भारतीय दंड संहिता यानि IPC की धारा 377 के तहत अप्राकृतिक सेक्स की श्रेणी में नहीं आता।

दरअसल इस पूरे प्रकरण में एक पिता ने अपने बेटे के साथ अप्राकृतिक सेक्स का आरोप लगाते हुए एक दुकानदार के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। आरोप था कि लड़के के पिता को उनकी अलमारी से पैसे गायब मिले, जब उन्होंने अपने बेटे से पूछा तो उसने बताया कि वो एक आनलाइन गेम OLA PARTY  खेलता है। जिसका रिचार्ज कराने वो मुंबई की दुकान पर जाता है। एक दिन जब वो रिचार्ज के लिए गया तो दुकानदार ने उसके होठो पर किस किया और उसके गुप्तांग को सहलाया था।

इस मामले में लड़के के पिता ने पुलिस से संपर्क किया और आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इस मामले में पुलिस ने IPC की धारा 377 ( Unnatural  SEX)  का मामला दर्ज किया गया। इस मामले में आजीवन कारावास की भी सजा होती है और जमानत देना मुश्किल हो जाता है। हाईकोर्ट के जस्टिस प्रभु देसाई ने आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि लड़के का मेडिकल टेस्ट उसके यौन उत्पीड़न की पुष्टि नहीं करता है। उन्होंने टिप्पणी में आगे कहा कि आरोपी के खिलाफ लगाये गये पाक्सो की धाराओं अधिकतम 5 साल की सजा का प्रावधान है, इसलिए उसे जमानत का प्रावधान है।

जस्टिस ने कहा कि पीड़ित की एफआईआर रिपोर्ट बताती है कि जमानत याचिका लगाने वाले आरोपी ने पीड़ित के प्राइवेट पार्ट को छुआ और उसे kiss को चूमा था। ये आईपीसी की धारा 377 के तहत अपराध नहीं है।

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