झारखंड: नवोदय परीक्षा कांड के तार बिहार से झारखंड तक, नवोदय में पढ़ रहे गरीब तेज तर्रार बच्चों को रैकेट वाले करते थे इस्तेमाल, जल्द खुलेंगे बड़े राज…

Jharkhand: Strings of Navodaya exam scandal from Bihar to Jharkhand, poor bright children studying in Navodaya were used by racketeers, big secrets will be revealed soon...

Jharkhand News: जवाहर नवोदय में दाखिले के लिए हुए खुलासे ने हर किसी को हैरान कर दिया है। मामले में 5 लोगों पर एफआईआर पर दर्ज तो हो गयी है, लेकिन इस खुलासे ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया को ही सवालों में खड़ा कर दिया है। लिहाजा पूरे प्रकरण की विस्तार से जांच की मांग होने लगी है। परीक्षा पर्यवेक्षिका दीपा सिन्हा ने मामले की शिकायत टुंडी पुलिस में दर्ज कराई है।

 

थाना प्रभारी उमा शंकर के अनुसार, दोनों फर्जी परीक्षार्थी, जिनकी जगह वे परीक्षा दे रहे थे उन दो छात्रों और एक शिक्षक समेत कुल पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। लेकिन आशंका है कि इसमें सिर्फ एक दो लोग शामिल नहीं है, बल्कि पूरा गैंग काम करता है। लिहाजा अब उस कड़ी की तलाश भी शुरू हो गयी है।

 

जानकार बताते हैं कि इस तरह की धांधली पहले से होती रही है। 30-50 हजार रुपये में दाखिले का पूरा ठेका चलता है, जिसमें 5 से 10 हजार रुपये छात्रों को दी जाती है, जबकि बाकी की रकम सेटर की तरफ से अलग-अलग लोगों को बांटा जाता था। जानकारी ये भी है कि इसमें नवोदय के बच्चों को ही परीक्षा में बैठाया जाता था।

 

आपको बता दें कि प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय टुंडी में जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा के दौरान एक बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। जहां दो छात्र दूसरों की जगह परीक्षा देते हुए रंगे हाथों पकड़े गए। पकड़े गए दोनों छात्र बिहार के बक्सर जिले के इतारी के रहने वाले हैं, जो वर्तमान में नवोदय विद्यालय बेनागड़िया में पढ़ रहे हैं।

 

जानकारी के मुताबिक सुधांशु प्रधान और हिमांशु प्रधान नाम के छात्रों ने समीर कुमार और नीतीश कुमार की जगह परीक्षा देने का प्रयास किया। मजिस्ट्रेट को इन छात्रों की उम्र अन्य परीक्षार्थियों से अधिक लगने पर संदेह हुआ। जांच में पता चला कि उनके गांव के एक शिक्षक ‘उदय सर’ ने इस पूरी साजिश को अंजाम दिया। शिक्षक ने न केवल स्कूल से छुट्टी दिलवाई बल्कि एडमिट कार्ड में हेरफेर कर इन्हें परीक्षा दिलवाने लाया। साफ है कि ऐसे गिरोह में शिक्षक भी शामिल होते हैं।

 

हालांकि यह पहला मामला नहीं है। पिछले वर्ष भी टुंडी के कुछ स्कूलों में मोटी रकम लेकर नवोदय विद्यालय की परीक्षा में फर्जी तरीके से छात्रों को बैठाने का मामला सामने आया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। सिर्फ जवाहर नवोदय ही नहीं, स्कूली बच्चों की प्रतिष्ठित परीक्षा भी इस खुलासे के बाद सवालों में है।

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