Seborrheic dermatitis: अचानक से कभी हमें अहसास होता है कि शरीर में दाने हो गये हैं। कई लोग इसे खुजली, घमोरी या कीड़े काटने की भूल समझ बैठते हैं, जबकि ये एक तरह की बीमारी होती है। इसे सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस कहा जाता है। त्वचा की सूजन का एक रूप है जो आमतौर पर खोपड़ी, चेहरे या धड़ पर या उसके आस-पास के क्षेत्रों में होता है जो स्वाभाविक रूप से सीबम नामक एक तैलीय पदार्थ का उत्पादन करते हैं।
सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस को सेबोरहाइक एक्जिमा भी कहा जाता है और इससे सर में रुसी हो सकती है । यदि यह शिशुओं में होता है, तो यह क्रैडल कैप का कारण बनता है ।

सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस है क्या?
सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस त्वचा से जुड़ी एक गंभीर स्थिति है। यह पपड़ीदार पैच, सूजन वाली त्वचा और जिद्दी रूसी का कारण बनता है। यह आमतौर पर शरीर के तैलीय क्षेत्रों को प्रभावित करता है, जैसे चेहरा, नाक के किनारे, भौहें, कान, पलकें और छाती। पर ये गंभीर स्थिति का रूप तब ले लेती है जब ये स्किन में इंफेक्शन को ट्रिगर करती है। यानी होता ये है कि इस बीमारी में स्किन के पोर्स ब्लॉक हो जाते हैं और फिर इनमें दाने निकलने लगते हैं।
सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस का कारण
सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस के सही कारणों के बारे में अब तक पता नहीं चल पाया है क्योंकि ये एक स्किन इंफेक्शन है जो कि कई कारणों से ट्रिगर कर सकता है। जैसे
-तनाव या किसी तनावपूर्ण जीवन की घटना से गुजरना
-कठोर डिटर्जेंट, सॉल्वैंट्स, कैमिकल्स और साबुन का इस्तेमाल करना
-मौसम में बदलाव जैसे ठंडी और गर्मी का आना और जाना
-कुछ दवाएं, जिनमें सोरालेन और लिथियम शामिल हो।
सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस के लक्षण
सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस का सबसे बड़ा लक्षण ये है कि स्किन के नीचे सफेद या पीले रंग की पपड़ीदार दाने निकल आते हैं। ये भूरी या काली त्वचा वाले लोगों में गहरे या हल्के दिख सकते हैं और सफेद त्वचा वाले लोगों में लाल रंग के दिख सकते हैं। अंगूठी के आकार के ये दाने पूरे शरीर पर फैल सकते हैं और सही से इलाज न होने पर लंबे समय तक के लिए रह सकते हैं। तो, लक्षण नजर आते ही डॉक्टर को दिखाएं।
सेबोरिक डर्मेटाइटिस के कारण
सेबोरिक डर्मेटाइटिस के सटीक कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स के अनुसार सीबम (Seborrhea) का अत्यधिक स्राव होना इस स्थिति का कारण हो सकता है, लेकिन इसे प्राथमिक कारण नहीं माना गया है।

ऐसा भी माना जाता है कि यह रोग मलेसेजिया (Malassezia) नामक एक यीस्ट के बढ़ने या फैलने से होने वाली सूजन व लालिमा के कारण होता है। तेल की ग्रंथियां (Oil Glands) इस यीस्ट के विरुद्ध प्रतिक्रिया देती हैं, जिससे त्वचा में सूजन व लालिमा की समस्याएं हो जाती है। सेबोरिक डर्मेटाइटिस से ग्रसित लोगों में यीस्ट के प्रति प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।

साथ ही कुछ स्थितियां भी हैं, जो इस इसके लक्षणों को बढ़ा सकती हैं जैसे तनाव, थकान, बीमारी और मौसम में बदलाव आदि। हालांकि, यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को नहीं फैलता है। पार्किसन्स रोग व स्ट्रोक से ग्रसित व्यक्ति और जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है, उन्हें सेबोरिक डर्मेटाइटिस होने का खतरा अधिक रहता है।
सेबोरिक डर्मेटाइटिस के जोखिम कारक

निम्न स्थितियां हैं, जो सेबोरिक डर्मेटाइटिस होने के जोखिम को बढ़ा सकती हैं –
• 30 से 60 साल के बीच की उम्र
• पार्किंसन रोग, स्ट्रोक, तनाव व अन्य बीमारियां
• प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होना या शराब की लत
• महिलाओं से ज्यादा पुरुष
सेबोरिक डर्मेटाइटिस का निदान
सेबोरिक डर्मेटाइटिस का निदान आमतौर पर डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा विशेष डॉक्टर) द्वारा किया जाता है, जो त्वचा पर विकसित हुए चकत्तों को देखकर ही स्थिति का पता लगा लेते हैं। सेबोरिक डर्मेटाइटिस का पता लगाने के लिए कोई टेस्ट करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। हालांकि, कुछ अन्य टेस्ट किए जा सकते हैं, जो पुष्टि करते हैं कि यह कोई अन्य बीमारी (जैसे फंगल इन्फेक्शन आदि) सेबोरिक डर्मेटाइटिस ही है।
सेबोरिक डर्मेटाइटिस से बचाव
सेबोरिक डर्मेटाइटिस की पूरी तरह से रोकथाम या बचाव करना संभव नहीं है, हालांकि त्वचा का विशेष ध्यान रखकर कुछ जोखिम कारकों को कम किया जा सकता है। सेबोरिक डर्मेटाइटिस की रोकथाम करने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखा जा सकता है –
• अल्कोहल वाले लोशन या अन्य प्रोडक्ट (जैसे हैंड सैनिटाइजर) का इस्तेमाल न करें
• किसी भी स्किन प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से पहले डर्मेटोलॉजिस्ट से बात करें
• शराब का अत्यधिक सेवन न करें
• शरीर का वजन न बढ़ने दें
• अच्छा आहार लें और स्वस्थ जीवनशैली की आदतों को अपनाएं

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