साहिबगंज। भरी सभा में उपायुक्त ने एक डाक्टर को बेइज्जत कर दिया। कह दिया…पैसे तो कुत्ते भी कमातेहैं, डाक्टर हो कम से कम तुम तो इंसानियत दिखाओ। उपायुक्त के इस रूख के बाद बवाल मच गया है। नाराज डाक्टरों ने टिप्पणी से खुद को आहत बताकर काम का बहिष्कार कर दिया है। साहिबगज में दो दिनों से डाक्टरों और जिला प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। आलम ये है कि दो दिनों से ओपीडी बंद चल रही है।

फिलहाज डाक्टरों की नराजगी कम नहीं हो रही है। वहीं उपायुक्त ने काम में लापरवाही पर नाराजगी जताने की बात कही है। घटना 4 जुलाई की बतायी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग मीटिंग में डीसी रामनिवास यादव ने राजमहल अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक उदय मुर्मू को फटकार लगा दी और कहा कि पैसे तो कुत्ते भी कमाते हैं… डाक्टर हो कम से कम इंसानियत तो दिखाओ। इसके बाद नाराज डाक्टर पिछले दिनों से हड़ताल पर चले गये है। उसी दिन बोरियो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डाक्टर बुद्धदेव मुर्मू को सस्पेंड कर दिया गया। इसके बाद से ही ओपीडी ठप है।

डाक्टर की निलंबन वापसी की मांग को लेकर डाक्टर हड़ताल पर हैं। सरकारी डाक्टरों की हड़ताल की वजह से सदर अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित अन्य जगहों पर मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ा। डाक्टरों ने उपायुक्त के व्यवहार पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि जब तक उनका निलंबन वापस नहीं होगा, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा।

इधर उपायुक्त की तरफ से भी कहा गया है कि उन्होंने लापरवाही पर डाक्टरों को डांटा जरूर था, लेकिन किसी तरह के अपशब्द नहीं करे थे। पिछले दिनों एक बच्ची की मौत हो गयी थी। अस्पताल में मौजूद एक आयुष डाक्टर ने बच्ची को एलौपैथी की दवाई दे दी थी। परिजनों का आरोप था कि गलत इलाज की वजह से उनकी बच्ची की मौत हुई है। जबकि अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक उदय मर्मू पास में ही निजी क्लिनिक में प्रैक्टिश कर रहे थे। इसके बाद कहा गया था कि पैसे तो कुत्ते भी कमाते हैं…आप डाक्टर हैं तो इंसानियत से कमाईये। वहीं डाक्टर बुद्धदेव मूर्मू ने गलत शपथ पत्र देकर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की किरकिरी करायी थी। इस मामले में सिविल सर्जन और बुद्धदेव मुर्मू दोनों को शो कॉज नोटिस जारी किया गया था।

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