पटना 20 मई 2022। IAS अभिषेक सिंह पर FIR दर्ज हो गई है। भ्रष्टाचार मामले में SVU यानि स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने FIR दर्ज की है। आरोप है कि अभिषेक सिंह जब गया के कलेक्टर थे, तो उन्होंने लाखों का भ्रष्टाचार किया था। उन्होंने अपने बंगले में लगे कीमती पेड़ों को कटवा दिया और पैसे का गोलमाल किया। इस मामले में DSP चंद्रभूषण को इन्वेस्टिगेशन अफसर बनाया गया है।


2006 बैच के IAS अभिषेक सिंह मूल रूप से त्रिपुरा कैडर के अफसर हैं। वो बिहार इंटर स्टेट कैडर डिप्टेशन पर आये थे। डिप्टेशन के दौरान उन्हें काफी अहम पद की जिम्मेदारी दी गयी थी। राज्य सरकार ने उन्हें डिप्टेशन खत्म होने के दो महीने पहले ही त्रिपुरा के लिए रिलीव कर दिया था। मूल कैडर में वापसी के बाद IAS के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। अभिषेक जनवरी 2018 से जनवरी 2022 तक गया के कलेक्टर रहे। IAS अभिषेक को प्रधानमंत्री अवार्ड भी मिल चुका है। ये अवार्ड गया जिले में सभी घरों तक बिजली पहुंचाने केलिए दिया गया था।


गया के कलेक्टर रहने के दौरान उन्हें सरकारी आवास मिला था। आरोप है कि उन्होंने कार्यकाल के दौरान सरकारी आवास के साथ-साथ कई जगहों से बगैर सरकार के परमिशन के ही कीमती पेड़ों को कटवा दिया और उसे बेच दिया। इस मामले एसपी जेपी मिश्रा के बयान पर मामला दर्ज किया गया है। सरकारी आवास में लगाये गये कीमती पेड़ों पर सरकार का अधिकार था, लेकिन कानून को ताक पर रखकर कलेक्टर ने पेड़ों को ना सिर्फ कटवा दिया, बल्कि उसके पैसे भी अपने पास रख लिये।


2006 बैच के IAS त्रिपुरा कैडर के हैं अफसर

2006 बैच के IAS अभिषेक सिंह 2016 में बिहार डिप्टेशन पर आये थे। आते ही बिहार सरकार ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी। 2016 से जनवरी 2018 तक वो बिहार म्यूनिसिपल कमिश्नर रहे। उसके बाद जनवरी 2018 में उन्हें गया का कलेक्टर बना दिया गया। 2021 में 30 दिसंबर को उन्हें गया के डीएम पद से हटाते हुए बिहार अरबन इंफ्रास्ट्राक्चर डेवलपमेंट कार्पोरेशन का एमडी बनाया गया और फिर दो महीने बाद 2 फरवरी को हटा दिया और बिहार राज्य योजना पर्षद में परामर्शी बनाया। उन्हें 5 साल के डिप्टेशन के बाद दो बार 6-6 माह का एक्सटेंशन मिला। उन्हें कार्य विस्तार के मुताबिक अप्रैल तक रहना था, लेकिन सरकार ने उन्हें दो महीने पहले ही मूल कैडर केलिए रिलीव कर दिया।

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