नई दिल्ली आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन के अवसर पर पूरे भारत ही नही उनको चाहने वाले देश विदेश के प्रशंसक जश्न मना रहे हैं। हर वर्ष प्रधानमंत्री अपने जन्म दिन के अवसर पर कोई न कोई ऐसी अनोखी उपहार से देशवासी को अचंभित करते रहे हैं जिसकी चर्चा खास बन जाती है। देशवासी को अनोखी गिफ्ट देने प्रधानमंत्री आज 9.40 में ग्वालियर पहुंचेंगे।

आज भारत में 70 साल बाद चीतों की वापसी होगी। देश में लुप्त हो चुके चीतों को नामीबिया से लाकर मध्य प्रदेश के कूनो वाइल्डलाइफ सेंचुरी में शनिवार को छोड़ा जाएगा। नामीबिया की राजधानी विंडहोक से 8 चीते भातर भारत आ रहे हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहेंगे। चीते विशेष मालवाहक विमान से लाए जा रहे हैं। जो विशेष रूप से बोइंग 747 को तैयार करके बनाया गया है। इस विमान पर चीते का मुंह प्रिंट किया गया है।

ऐसे लाए जा रहे हैं चीते

विशेष मालवाहक विमान 74 7- 400 को इस तरह डिजाइन किया गया है कि चीतों को आभास न हो कि उन्हें कहीं बाहर ले जाया जा रहा है। चीते के पास सिर्फ पशु चिकित्सकों को जाने की अनुमति है। नामीबिया से भारत आने में एक 11 घंटे लगेंगे। चीतों को बीमार होने से बचाने के लिए खाली पेट लाया जा रहा है। ग्वालियर से चीतों को भारतीय वायु सेना के चिनूक हेलिकॉप्टर के जरिए केएनपी हेलीपेड पर उतारा जाएगा। 17 सितंबर की सुबह ग्वालियर हवाई अड्डे पहुंचने के बाद दोपहर में कूनो राष्ट्रीय उद्यान में ले जाया जाएगा।

देश में अंतिम चीते की मौत 1947 में

देश में चीते 1952 में विलुप्त घोषित किए जा चुके हैं।अंतिम चीते की मौत 1947 में छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में हुई थी।

सवाल भारत में चीते रह सकेंगे

अफ्रीका में भारत की तरह सर्दी, गर्मी तथा बारिश का मौसम रहता है। चीतों को जिंदा रहने के लिए दो महत्वपूर्ण परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। शिकार के लिए उनको खुले सवाना तथा घास के मैदान होने चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि पार्क में इनके अनुकूल जगह बनाई गई।

कड़ी निगरानी में रहेंगे

नामीबिया से आ रहे चीजों को सुरक्षा में मद्देनजर वैक्सीन लगाई गई है। साथ ही सेटेलाइट कॉलर पहनाया गया है। भारत में चीतों को राष्ट्रीय उद्यान में 1 महीने के लिए क्वारंटाइन किया जाएगा। लगातार कड़ी निगरानी में रखा जाएगा। बाद में संरक्षित क्षेत्र में छोड़ा जाएगा।

तीन नर चीते 5 मादा

पहले और दूसरे नर चीते की उम्र 5.5 साल है। दोनों नर चीता भाई है। जो ओटजीवारोगों के पास एक निजी रिजर्व के जंगल में रह रहे हैं। जुड़वा नर शावक जीवन भर साथ रहते हैं और मिलकर शिकार करते हैं।

तीसरे नर चीते का जन्म 2018 में नामीबिया के एरिंडी प्राइवेट गेम रिजर्व में हुआ था। उसका जन्म चीता कंजर्वेशन फाउंडेशन द्वारा पुनर्वासित किया गया था।

मादा चीते की उम्र 2 साल ,3.5 साल, 2.5साल, 5 साल की 2चीते भारत पहुंचेंगे।

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