स्वास्थ्यकर्मियों को झटका: नियमितीकरण की मांग, हड़ताल व प्रदर्शन नहीं कर पायेंगे NHM के स्वास्थ्यकर्मी, इस राज्य में जारी हुआ फरमान, मचा हड़कंप

रायपुर/ रांची। झारखंड में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत काम कर रहे ANM, GNM और पैरामेडिकल स्टाफ इन दिनों नियमितीकरण की मांग को लेकर हड़ताल पर है। 20 दिन से ज्यादा गुजर जाने के बावजूद अभी तक हड़ताली स्वास्थ्यकर्मियों के संदर्भ में राज्य सरकार का रुख स्पष्ट नहीं हो पाया है। ना तो वार्ता की पहल हुई है और ना ही समाधान का कोई रास्ता नजर आ रहा है। इन सबके बीच झारखंड से सटे छत्तीसगढ़ में NHM के स्वास्थ्य कर्मियों को लेकर नए फरमान ने होश उड़ा दिया है।

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एक आदेश जारी किया गया है, जिसमें इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि एनएचएम के तहत नियुक्त होने वाले स्वास्थ्यकर्मी ना तो नियमितीकरण की मांग कर सकेंगे और ना की सेवा समाप्त किए जाने के फैसले का विरोध करेंगे। यही नहीं नियमितीकरण की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन भी NHM के स्वास्थ्य कर्मियों की तरफ से नहीं किया जाएगा। इस बाबत स्वास्थ्य विभाग ने सभी एनएचएम के तहत काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को शपथ पत्र दायर करने को कहा है।

जाहिर है राज्य सरकार में अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है कि एनएचएम के तहत काम कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों को नियमित नहीं किया जाएगा। शपथ पत्र लेने का मकसद साफ है निर्देश की अवहेलना करेगा,उन स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकेगी।

झारखंड में स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल का क्या होगा समाधान?

आपको बता दें कि झारखंड में स्वस्थ कर्मियों की हड़ताल लंबे समय से चल रही है। प्रदेश में हड़ताल की वजह से स्वास्थ्य व्यवस्था पर बुरा असर भी पड़ रहा है । इसके बावजूद राज्य सरकार की तरफ से हड़ताल तोड़ने की दिशा में अब तक कोई पहल नहीं की गई है । कई दौर के प्रदर्शन, ज्ञापन और आमरण अनशन का भी राज्य सरकार के रूख पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल का समाधान फिलहाल निकलता दिख नहीं रहा है। राज्य सरकार एक तरफ जहां अड़ियल रुख अपनाए हुए है, तो वहीं स्वास्थ्य कर्मी भी जिद पर अड़े हुए हैं। इस जिद और अहम के टकराव में प्रदेश की स्वास्थ्य वयवस्था तो प्रभावित हो ही रही है, हड़ताल का भी कोई निराकरण निकलता नजर नहीं आ रहा है।

पिछले दिनों के कैबीनेट की बैठक में भी इस संदर्भ में किसी तरह का कोई निर्णय नहीं हुआ। हालांकि पिछले दिनों स्वास्थ्यकर्मियों को यह आश्वासन स्वास्थ्य मंत्री की तरफ से जरूर मिला था कि जल्द ही इस दिशा में विभागीय स्तर पर पहल की जाएगी। लेकिन, अभी तक इस दिशा में स्वास्थ विभाग का रूख बिल्कुल नकारात्मक रहा है। इधर आमरण अनशन पर बैठे स्वास्थ्य कर्मियों की तबीयत एक के बाद एक लगातार बिगड़ती जा रही है। जाहिर है आने वाले दिनों में जब बजट सत्र की शुरुआत होगी तो इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल का मुद्दा जरूर सदन में गर्म आएगा। हालांकि सदन का शोर क्या हड़ताली स्वास्थ्य कर्मियों को न्याय दिला पाएगा? एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

Related Articles

close