एक पेशी की कीमत में खरीद सकते हैं लग्जरी घर… भारत के इन वकीलों की फीस सुनकर उड़ जाएंगे होश!
कोर्टरूम के ये दिग्गज सिर्फ केस नहीं लड़ते, बल्कि हर सुनवाई में करोड़ों का खेल चलता है

नई दिल्ली। कानून की दुनिया में कुछ नाम ऐसे हैं, जिनकी मौजूदगी ही किसी केस का रुख बदलने के लिए काफी मानी जाती है। ये वकील सिर्फ तर्क और कानून की भाषा नहीं बोलते, बल्कि हर दलील के पीछे उनकी वर्षों की मेहनत, अनुभव और रणनीति छिपी होती है। लेकिन इनकी फीस इतनी ज्यादा है कि एक आम आदमी के लिए सिर्फ एक सुनवाई का खर्च ही जिंदगीभर की कमाई के बराबर हो सकता है।
इस रिपोर्ट में हम आपको भारत के उन दिग्गज वकीलों से रूबरू करा रहे हैं, जिनकी गिनती देश के सबसे प्रभावशाली और महंगे कानूनी चेहरों में होती है।
सबसे पहले बात हरीश साल्वे की, जिन्हें भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी पहचान हासिल है। 22 जून 1955 को जन्मे साल्वे ने अपने करियर की शुरुआत दिग्गज वकीलों के साथ की और कई हाई-प्रोफाइल मामलों में देश का प्रतिनिधित्व किया। कुलभूषण जाधव केस में उनकी भूमिका काफी चर्चित रही। उनकी फीस आज लगभग 35 लाख रुपये प्रति सुनवाई तक पहुंच चुकी है, जबकि उनकी कुल संपत्ति सैकड़ों करोड़ में आंकी जाती है।
इसके बाद नाम आता है मुकुल रोहतगी का, जिनका कानूनी करियर चार दशकों से भी ज्यादा लंबा है। मुंबई में जन्मे रोहतगी ने 2014 से 2017 तक देश के अटॉर्नी जनरल के रूप में काम किया। उन्होंने कई संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामलों में पैरवी की है। उनकी फीस एक से दो करोड़ रुपये प्रति केस तक बताई जाती है, जो उन्हें देश के सबसे महंगे वकीलों में शामिल करती है।
वहीं पी. चिदंबरम का सफर कानून से राजनीति तक फैला हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पकड़ रखने वाले चिदंबरम ने देश के वित्तमंत्री और गृहमंत्री जैसे अहम पद भी संभाले हैं। उनकी प्रति सुनवाई फीस 10 से 12 लाख रुपये के बीच बताई जाती है, जो उनके अनुभव और कद को दर्शाती है।
कानून और राजनीति दोनों में प्रभाव रखने वाले अभिषेक मनु सिंघवी भी इस सूची में शामिल हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने वाले सिंघवी कई बड़े नेताओं का अदालत में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उनकी फीस 6 से 11 लाख रुपये प्रति पेशी है और उनकी गिनती देश के प्रभावशाली कानूनी चेहरों में होती है।
अंत में बात कपिल सिब्बल की, जिनका नाम कई ऐतिहासिक और विवादित मामलों से जुड़ा रहा है। 1972 से वकालत कर रहे सिब्बल ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद और 2जी स्पेक्ट्रम जैसे मामलों में अहम भूमिका निभाई। उनकी फीस भी 10 से 12 लाख रुपये प्रति सुनवाई के आसपास है।
इन सभी वकीलों की एक खास बात यह है कि ये सिर्फ कानूनी विशेषज्ञ नहीं, बल्कि रणनीतिकार भी हैं। कोर्टरूम में इनके एक-एक शब्द की कीमत लाखों में होती है, और यही वजह है कि बड़े से बड़े केस में इन्हें ही प्राथमिकता दी जाती है।









