मौत का महाकाल! 4700 लाशें..राख बने स्कूल…हेल्थ सेंटर तबाह…जंग के पीछे छिपी खौफनाक सच्चाई…क्या US से जंग में ईरान खत्म होने की कगार पर?

तेहरान/वॉशिंगटन: जंग जब शुरू होती है, तो सिर्फ सीमाएं नहीं टूटतीं… इंसानियत भी बिखर जाती है। हालिया संघर्ष में ईरान को जो नुकसान हुआ है, उसके आंकड़े सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं।

बताया जा रहा है कि इस युद्ध में करीब 4700 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो चुकी है। ये सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के उजड़ने की कहानी है—हर संख्या के पीछे एक अधूरी जिंदगी और बिखरा हुआ घर है।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती…

 स्कूल बने खंडहर, बच्चों के सपने मलबे में दबे

इस संघर्ष में 760 से ज्यादा स्कूल पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। जहां कभी बच्चों की हंसी गूंजती थी, वहां अब सन्नाटा और धूल उड़ रही है। शिक्षा व्यवस्था पर ऐसा वार आने वाली पीढ़ियों को अंधेरे में धकेल सकता है।

 हेल्थ सिस्टम भी चरमराया—300 सेंटर मिट्टी में मिल गए

जंग ने स्वास्थ्य सेवाओं को भी नहीं छोड़ा। 300 से ज्यादा हेल्थ सेंटर जमींदोज हो गए हैं। इलाज के लिए भटकते लोग, दवाओं की कमी और टूटती उम्मीदें—यह हालात किसी भी देश के लिए डरावने सपने से कम नहीं।

 क्या यही जंग की असली कीमत है?

ईरान को हुए इस नुकसान ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है—क्या जंग कभी किसी के लिए फायदेमंद होती है? या फिर यह सिर्फ तबाही और दर्द का अंतहीन सिलसिला है? जमीन पर बिखरे मलबे और आसमान में गूंजते धमाके इस बात के गवाह हैं कि इस संघर्ष ने ईरान को अंदर तक झकझोर दिया है।

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