दु:खद! मैट्रिक के रिजल्ट के दो घंटे पहले डर से छात्रा ने कर ली आत्महत्या, रिजल्ट आया तो पास हुई फर्स्ट डिवीजन,
Tragic! Two hours before the matriculation results, a student committed suicide out of fear. When the results came, she passed with first division.

हाईस्कूल की एक छात्रा ने मैट्रिक परीक्षा परिणाम आने से पहले आत्महत्या कर ली। बाद में पता चला कि वह 63 प्रतिशत अंकों से पास हुई थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है। छात्रा ने अपने ही घर में फांसी लगा ली थी।
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Board Result Accident। मैट्रिक परीक्षा के रिजल्ट के दो घंटे पहले एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली। छात्रा इस बात को लेकर डर में थी, कि कहीं वो फेल ना हो जाये। लेकिन, जब रिजल्ट जारी हुआ, तो छात्रा फर्स्ट डिवीजन में पास हुई थी । दुखद बात ये थी, कि इस रिजल्ट को देखने के लिए वो इस दुनिया में मौजूद नहीं थी। घटना उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के लालगंज कस्बे की है। जहां से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है।
गुरुवार को यूपी बोर्ड का रिजल्ट आया था। इसी दौरान हाईस्कूल की एक 14 वर्षीय छात्रा ने परीक्षा परिणाम घोषित होने से ठीक पहले आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। सबसे दुखद पहलू यह रहा कि परिणाम आने के बाद पता चला कि छात्रा परीक्षा में 63 प्रतिशत अंकों के साथ सफल हुई थी।
मृतका की पहचान ज्योति के रूप में हुई है, जो लालगंज कस्बे में अपने परिवार के साथ रहती थी। उसके पिता छोटेलाल प्रजापति स्थानीय स्तर पर किराने की दुकान चलाते हैं, जबकि उसकी मां पुष्पा देवी कुदरहा ब्लॉक में आशा कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत हैं। घटना के समय उसकी मां अपने बेटे के साथ किसी बैठक में गई हुई थीं और ज्योति घर पर अकेली थी।
जानकारी के अनुसार, परीक्षा परिणाम घोषित होने से करीब दो घंटे पहले ही ज्योति ने अपने घर के एक कमरे में दुपट्टे के सहारे फंदा लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। जब परिजन घर लौटे तो उन्होंने ज्योति को इस हालत में देखा, जिसके बाद घर में कोहराम मच गया। आसपास के लोगों ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया है।
घटना के बाद पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा की कार्रवाई पूरी की। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मामले की जांच कर रहे लालगंज थाना प्रभारी विनय कुमार पाठक ने बताया कि छात्रा की मौत के पीछे के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
इस घटना ने एक बार फिर से छात्रों पर परीक्षा और परिणाम को लेकर पड़ने वाले मानसिक दबाव की ओर ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ज्योति ने यह कदम किन कारणों से उठाया, लेकिन इस तरह की घटनाएं समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं।
नोट- अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए, खासकर परीक्षा के समय। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि परीक्षा के परिणाम ही जीवन का अंतिम सत्य नहीं होते और किसी भी परिस्थिति में निराशा या दबाव में आकर ऐसा कठोर कदम नहीं उठाना चाहिए।









