सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश से हिल गया चुनाव आयोग! SIR पर ऐसे निर्देश कि बंगाल भेजने पड़े दर्जनों ऑब्जर्वर

वोटर लिस्ट में ‘लॉजिकल गड़बड़ियों’ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, EC ने पश्चिम बंगाल में बढ़ाई निगरानी

सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर क्या कहा कि चुनाव आयोग को बंगाल में भेजने पड़े ऑब्जर्वर?

पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट को लेकर चल रही हलचल अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है। कोर्ट के सख्त निर्देशों के ठीक एक दिन बाद ही भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने बड़ा कदम उठाते हुए राज्य में कम से कम 10 और इलेक्टोरल रोल ऑब्जर्वर तैनात करने का फैसला किया है।



मकसद साफ है— वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को बिना किसी गड़बड़ी और पूरी पारदर्शिता के पूरा करना।

 अचानक क्यों बढ़ानी पड़ी निगरानी?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने 10 से 12 जिलों की पहचान की है, जहां SIR प्रक्रिया EC के तय निर्देशों के मुताबिक नहीं चल रही थी
इनमें से अधिकतर जिले उत्तरी बंगाल के बताए जा रहे हैं।

अब जो नए रोल ऑब्जर्वर भेजे जा रहे हैं, वे
 फील्ड लेवल पर सीधे निगरानी करेंगे
 BLO और अन्य अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नजर रखेंगे

EC ने साफ संदेश दिया है कि

किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अगर कोई बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) या अधिकारी दोषी पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

 सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्या कह दिया?

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को कड़े और साफ निर्देश दिए थे। कोर्ट ने कहा कि जिन वोटरों के एन्यूमरेशन फॉर्म में ‘लॉजिकल गड़बड़ियां’ पाई गई हैं, उनके नाम—

  • ग्राम पंचायत भवन

  • ब्लॉक ऑफिस

  • वार्ड ऑफिस

 हर जगह सार्वजनिक रूप से चस्पा किए जाएं, ताकि लोग बिना परेशानी के जानकारी देख सकें।

 1.25 करोड़ वोटरों को भेजा गया नोटिस!

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी खुलासा किया कि करीब 1.25 करोड़ लोगों को नोटिस भेजे गए हैं, जिनमें कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं, जैसे—

  • माता-पिता के नाम में बेमेल

  • माता-पिता और बच्चों की उम्र में असामान्य अंतर

  • माता-पिता के नाम पर 6 से ज्यादा बच्चे दर्ज होना

कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में प्रभावित लोगों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए।

 ऑथराइज्ड प्रतिनिधि के जरिए भी मिल सकेगी राहत

SC ने यह भी निर्देश दिया कि जिन लोगों पर असर पड़ सकता है, वे
 खुद या
 अपने ऑथराइज्ड प्रतिनिधि (जैसे BLA) के जरिए

अपने दस्तावेज और आपत्तियां जमा कर सकते हैं। इसके लिए एक साधारण साइन या अंगूठे के निशान वाला लेटर ही काफी होगा।

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