युद्ध की आग में झुलसा खेल जगत! क्रिकेट के बाद अब F1 पर भी पड़ा ताला, दो बड़े ग्रैंड प्रिक्स रद्द… करोड़ों का नुकसान तय

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर खेलों पर, बहरीन और सऊदी अरब ग्रैंड प्रिक्स कैंसिल; पहले ही श्रीलंका-अफगानिस्तान सीरीज हो चुकी है रद्द

दुनिया में बढ़ते युद्ध के तनाव का असर अब खेल जगत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। क्रिकेट के बाद अब मोटर रेसिंग की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिता फॉर्मूला 1 भी इस संकट की चपेट में आ गई है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष और सुरक्षा चिंताओं के चलते फॉर्मूला 1 प्रबंधन ने बड़ा फैसला लेते हुए 2026 के कैलेंडर में शामिल बहरीन ग्रैंड प्रिक्स और सऊदी अरब ग्रैंड प्रिक्स को रद्द करने की घोषणा कर दी है।

यह फैसला चीन ग्रैंड प्रिक्स से ठीक पहले लिया गया, जिसने पूरी रेसिंग दुनिया को चौंका दिया। अप्रैल में आयोजित होने वाली इन दोनों रेसों को सुरक्षा जोखिमों के गहन विश्लेषण के बाद रद्द किया गया है। फॉर्मूला 1 के सीईओ स्टेफानो डोमेनिकली ने कहा कि यह निर्णय आसान नहीं था, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए खिलाड़ियों, टीमों और स्टाफ की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

इस फैसले पर FIA के अध्यक्ष मोहम्मद बेन सुलेयम ने भी जोर दिया कि ड्राइवरों, टीमों और सहयोगी कर्मचारियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। लंबे विचार-विमर्श और सुरक्षा एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद ही इन दोनों रेसों को रद्द करने का निर्णय लिया गया।

दरअसल, यह पहला मौका नहीं है जब युद्ध के कारण खेल आयोजन प्रभावित हुए हैं। इससे पहले श्रीलंका और अफगानिस्तान के बीच होने वाली वनडे सीरीज भी सुरक्षा कारणों के चलते रद्द कर दी गई थी। लगातार रद्द हो रहे खेल आयोजनों से अंतरराष्ट्रीय खेल कैलेंडर पर भी असर पड़ रहा है।

फॉर्मूला 1 के इन दोनों बड़े इवेंट्स के रद्द होने से 2026 के सीजन पर भी बड़ा प्रभाव पड़ा है। फिलहाल इन्हें दोबारा आयोजित करने या नई तारीख तय करने की कोई योजना सामने नहीं आई है। आयोजकों ने अन्य वेन्यू और संभावित विकल्पों पर भी विचार किया, लेकिन व्यस्त शेड्यूल और लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण ऐसा करना संभव नहीं हो सका।

इन रेसों के रद्द होने से अब जापानी ग्रैंड प्रिक्स और मियामी ग्रैंड प्रिक्स के बीच लगभग पांच हफ्तों का लंबा अंतराल बन गया है। वहीं, इन बड़े आयोजनों के नहीं होने से आयोजकों और मेजबान देशों को करोड़ों रुपये के आर्थिक नुकसान की आशंका भी जताई जा रही है।

युद्ध के बढ़ते साये के बीच अब सवाल यह उठने लगा है कि क्या आने वाले दिनों में और भी बड़े खेल आयोजन इसकी चपेट में आ सकते हैं। फिलहाल खेल जगत की नजरें वैश्विक हालात पर टिकी हुई हैं।

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