शपथ ले रहे थे सुवेंदु अधिकारी…उधर ममता बनर्जी दे रही थी रवीन्द्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि…
बंगाल में पहली बार BJP सरकार बनने के बीच ममता बनर्जी की खामोशी ने बढ़ाई सियासी हलचल, शपथ समारोह से दूरी और टैगोर के नाम दिया ऐसा संदेश जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया

पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज ऐसा दिन देखने को मिला जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। राज्य में पहली बार BJP की सरकार बनी और कभी ममता बनर्जी के सबसे करीबी माने जाने वाले सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। लेकिन इस ऐतिहासिक मौके पर सबसे बड़ा सवाल यही बना रहा कि आखिर विपक्ष कहां था?
आमतौर पर किसी भी शपथ ग्रहण समारोह में सत्ता और विपक्ष दोनों की मौजूदगी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग थी। ना ममता बनर्जी दिखाई दीं, ना अभिषेक बनर्जी और ना ही तृणमूल कांग्रेस का कोई बड़ा चेहरा। इसी बीच ममता बनर्जी की एक पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी।
जब राजभवन में सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे, उसी समय ममता बनर्जी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती को लेकर श्रद्धांजलि संदेश साझा कर रही थीं। उन्होंने गुरुदेव को मानवता, एकता और जागृत चेतना का प्रतीक बताया। ममता ने लिखा कि रवींद्रनाथ टैगोर का दर्शन बंगाली भाषा, संस्कृति और विरासत के पुनर्जागरण का प्रतीक है और उनके विचार आज भी समाज को जोड़ने का काम कर रहे हैं।
अपने संदेश में ममता बनर्जी ने कहा कि “विभाजन सत्य नहीं है, बल्कि एकता ही सच्चाई है।” उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। कई लोग इसे बंगाल की बदलती राजनीति पर अप्रत्यक्ष प्रतिक्रिया मान रहे हैं।
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने टैगोर को सिर्फ कवि नहीं बल्कि ऐसी चेतना बताया जिसने साहित्य, संस्कृति और समाज को नई दिशा दी। उन्होंने गुरुदेव की रचनाओं का उल्लेख करते हुए लिखा कि भारत के इस महापुरुष की चेतना आने वाले समय में भी लोगों को राह दिखाती रहेगी।
हालांकि सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि आखिर बंगाल की सत्ता हाथ से निकलने के बाद भी ममता बनर्जी ने सुवेंदु अधिकारी को लेकर एक शब्द तक क्यों नहीं कहा। उनकी खामोशी अब बंगाल की राजनीति में नए संकेत देती नजर आ रही है।









