मौत से पहले लिया ऐसा फैसला… हरीश ने जाते-जाते कई जिंदगियों में लौटा दी रोशनी, डॉक्टर भी रह गए हैरान!

Harish Rana की इच्छामृत्यु के बाद हार्ट वॉल्व और कॉर्निया का सफल ट्रांसप्लांट, AIIMS Delhi ने बताया कैसे बचाई जा सकती हैं कई जिंदगियां

कभी-कभी एक इंसान का आखिरी फैसला, कई अनजान लोगों के लिए नई जिंदगी की शुरुआत बन जाता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है।

31 वर्षीय Harish Rana ने इच्छामृत्यु से पहले ऐसा निर्णय लिया, जिसने उनके जाने के बाद भी कई जिंदगियों में उम्मीद की किरण जगा दी।

AIIMS Delhi के डॉक्टरों के अनुसार, हरीश के कॉर्निया और हार्ट वॉल्व को सफलतापूर्वक निकालकर ट्रांसप्लांट के लिए सुरक्षित कर लिया गया है। यह फैसला उनके माता-पिता की इच्छा के अनुरूप लिया गया, ताकि उनका बेटा दूसरों के जीवन में रोशनी बन सके।

डॉक्टरों का कहना है कि कॉर्निया ट्रांसप्लांट से किसी व्यक्ति की खोई हुई रोशनी वापस लाई जा सकती है, जबकि हार्ट वॉल्व गंभीर हृदय रोगियों के लिए नई जिंदगी का मौका बन सकते हैं।


कैसे निकाले जाते हैं हार्ट वॉल्व?

विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी व्यक्ति का पूरा दिल ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त नहीं होता, तब भी उसके हार्ट वॉल्व को सुरक्षित तरीके से निकाला जा सकता है। इस प्रक्रिया को ‘हार्ट वॉल्व रिट्रीवल’ कहा जाता है।

डोनर को ऑपरेशन थिएटर में ले जाकर दिल के जरूरी हिस्सों को सावधानीपूर्वक निकाला जाता है। भले ही दिल पूरी तरह उपयोगी न हो, लेकिन उसके वॉल्व दूसरे मरीजों के लिए बेहद अहम साबित होते हैं।


सालों तक कैसे सुरक्षित रहते हैं ये वॉल्व?

अगर तुरंत ट्रांसप्लांट संभव न हो, तो इन वॉल्व को -180 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ‘क्रायोप्रिजर्वेशन’ तकनीक से सुरक्षित रखा जाता है। इस तकनीक की मदद से ये वॉल्व करीब 5 साल तक इस्तेमाल के लिए सुरक्षित रह सकते हैं।


ट्रांसप्लांट की पूरी प्रक्रिया क्या है?

दिल से निकाले गए वॉल्व को विशेष ‘वॉल्व बैंक’ में ले जाया जाता है, जहां विशेषज्ञ 10 से 15 मिनट के भीतर एओर्टिक और पल्मोनरी वॉल्व को अलग करते हैं। इसके बाद उन्हें प्रोसेस कर दूसरे मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है।

इन वॉल्व का इस्तेमाल खासतौर पर गंभीर सर्जरी, संक्रमण वाले मामलों और बच्चों के इलाज में किया जाता है। खास बात यह है कि बड़े व्यक्ति के वॉल्व को बच्चों के अनुसार ढाला भी जा सकता है।


कॉर्निया ट्रांसप्लांट क्यों है इतना अहम?

डॉक्टरों के अनुसार, आंख का कॉर्निया कुछ समय तक बिना रक्त संचार के भी सुरक्षित रहता है। ऐसे में समय रहते इसे निकालकर किसी जरूरतमंद व्यक्ति में ट्रांसप्लांट किया जा सकता है, जिससे उसकी आंखों की रोशनी वापस आ सकती है।


एक फैसला, कई जिंदगियां

Harish Rana की यह कहानी सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक संदेश है—अंगदान के जरिए कोई भी इंसान अपने जाने के बाद भी कई लोगों के जीवन में उम्मीद की नई रोशनी जगा सकता है।

 

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