तेलंगाना की सियासत में आया ‘ग्रामीण भूकंप’! 4159 पंचायतों में कांग्रेस का कब्जा, BRS को झटका—BJP लगभग साफ

गैर-दलीय चुनाव, लेकिन नतीजे बोले—गांवों ने किसे सत्ता की असली ताकत माना? आंकड़े देख चौंक जाएंगे आप

हैदराबाद।
तेलंगाना की राजनीति में गांवों से उठा संदेश अब राजधानी तक गूंज रहा है। तीन चरणों में हुए ग्राम पंचायत चुनावों के नतीजों ने साफ कर दिया है कि राज्य की सत्ताधारी कांग्रेस ने ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है
कुल 4,159 ग्राम पंचायतों में से कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने 2,246 सरपंच पदों पर जीत दर्ज कर 53 प्रतिशत से ज्यादा सीटों पर कब्जा जमा लिया है।

वहीं, भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने कड़ी टक्कर देते हुए 1,163 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा सिर्फ 246 सीटों पर सिमट गई। निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों के खाते में 491 पंचायतें गईं।

तीसरे चरण में भी कांग्रेस का दबदबा

तीसरे और अंतिम चरण के चुनावों में भी कांग्रेस का प्रदर्शन बाकी दलों पर भारी पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक,
हाल ही में जुबली हिल्स विधानसभा उपचुनाव जीतने के बाद ग्राम पंचायत चुनावों को कांग्रेस, बीआरएस और भाजपा की लोकप्रियता की अग्निपरीक्षा माना जा रहा था।

हालांकि ये चुनाव गैर-दलीय आधार पर हुए, लेकिन नतीजों ने यह साफ कर दिया कि राजनीतिक झुकाव किस ओर है

ग्रामीण राजनीति में कांग्रेस की मजबूत पकड़

पर्यवेक्षकों का मानना है कि ग्राम पंचायत अध्यक्ष और वार्ड सदस्य पदों पर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों की जीत इस बात का संकेत है कि
रेवंत रेड्डी सरकार को गांवों का भरोसा हासिल है

वरिष्ठ पत्रकार से वकील बने सी. आर. सुकुमार का कहना है—

“यह परिणाम साबित करते हैं कि 2023 के विधानसभा चुनाव कोई संयोग नहीं थे। कांग्रेस को ग्रामीण इलाकों का ठोस समर्थन प्राप्त है।”

BRS को झटका, लेकिन खेल खत्म नहीं

हालांकि कांग्रेस की जीत बड़ी है, लेकिन BRS को पूरी तरह कमजोर नहीं माना जा रहा
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, बीआरएस ने अब भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनाए रखी है और वापसी की गुंजाइश बनी हुई है।

BRS के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव ने दावा किया कि—

“कांग्रेस का पतन अब ग्रामीण स्थानीय निकाय चुनावों से शुरू हो चुका है। सत्ता के कथित दुरुपयोग के बावजूद BRS ने बड़ी संख्या में पंचायतें जीती हैं।”

भाजपा के लिए खतरे की घंटी

इन चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा।
विशेषज्ञों का कहना है कि जुबली हिल्स उपचुनाव में जमानत जब्त होने के बाद भाजपा की स्थिति और कमजोर होती नजर आ रही है।
ग्रामीण इलाकों में पार्टी की विस्तार योजनाएं फिलहाल कागजों तक सीमित दिख रही हैं।

कांग्रेस का दावा: गांवों ने फिर पहनाया ताज

तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ ने 17 दिसंबर को कहा—

“गांवों ने एक बार फिर कांग्रेस को जीत का ताज पहनाया है। यह परिणाम हमारी सरकार के सुशासन की पुष्टि करते हैं।”

भारी मतदान, बड़ा संदेश

तेलंगाना राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) के अनुसार—

  • 🗳️ मतदान प्रतिशत: 85.30%

  • 👥 लगभग 12,700 सरपंच पद

  • 👥 1.12 लाख वार्ड सदस्य

इन आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि ग्रामीण मतदाता चुप नहीं बैठा—उसने खुलकर फैसला सुनाया है

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