झारखंड निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त: 2000 करोड़ का फंड अटका, विकास योजनाएं ठप, जानिए क्या है पूरा मामला?
High Court strict on delay in Jharkhand civic elections: 2000 crore funds stuck, development plans stalled, know what is the whole matter?

झारखंड निकाय चुनाव पर हाईकोर्ट का सख्त रुख
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने नगर निकाय चुनाव में हो रही लगातार देरी पर गंभीर नाराजगी जताई है। अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस आनंद सेन ने राज्य के मुख्य सचिव को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने चुनाव की समयसीमा तय नहीं की तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई होगी। अदालत ने कहा कि संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार हर पांच साल में चुनाव कराना अनिवार्य है, लेकिन सरकार ने इस नियम को नजरअंदाज कर दिया है।
कोर्ट का निर्देश
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से उस आदेश की प्रति पेश करने को कहा, जिसके आधार पर ट्रिपल टेस्ट के बाद चुनाव कराने का निर्णय लिया गया था। सरकार ने समय की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। अब मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी और मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा।
चुनाव न होने से विकास कार्य ठप
झारखंड के 13 नगर निकायों का कार्यकाल 2020 में और 35 निकायों का कार्यकाल अप्रैल 2023 में समाप्त हो गया। चुनाव न होने से इन निकायों में अफसरशाही हावी हो गई है और विकास कार्य रुक गए हैं। केंद्र सरकार ने भी 15वें वित्त आयोग से मिलने वाले करीब 2000 करोड़ रुपये का फंड रोक दिया है।
जिलों पर असर
रांची: 32 करोड़ की योजनाओं में तालाब जीर्णोद्धार, सड़क और पुल निर्माण अधर में लटके।
धनबाद: क्लीन एयर प्रोग्राम के लिए 120 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन फंड न मिलने से तीन दर्जन प्रोजेक्ट रुके।
जमशेदपुर: मानगो नगर निगम को हर साल लगभग 250 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, जिससे सड़क, नाली और सीवरेज प्रोजेक्ट प्रभावित हैं।









