ईरान युद्ध से मचा तेल का तूफान! जयशंकर के एक बयान ने बढ़ाई हलचल, क्या ट्रंप को लगेगी ‘मिर्ची’?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के साए से तेल बाजार में डर का माहौल, भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दिया बड़ा संकेत

ईरान युद्ध से मचा तेल का तूफान! जयशंकर के एक बयान ने बढ़ाई हलचल, क्या ट्रंप को लगेगी ‘मिर्ची’?
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध जैसे हालात अब पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बनते जा रहे हैं। ईरान पर इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखने लगा है और इसी बीच भारत की तरफ से आया एक बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है।
दरअसल, कुछ समय पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया था कि अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो बढ़ने दी जाएं, फिलहाल उनकी प्राथमिकता युद्ध है। ट्रंप के इस बयान ने पहले ही ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी थी। अब भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर का बयान सामने आने के बाद यह मुद्दा और ज्यादा गरमा गया है।
सोमवार को राज्यसभा में बोलते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ कहा कि पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम क्षेत्र है। भारत लंबे समय से इस इलाके से तेल और गैस की बड़ी मात्रा में आपूर्ति लेता रहा है। ऐसे में यदि यहां किसी तरह की आपूर्ति बाधित होती है या हालात अनिश्चित होते हैं, तो यह भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।
जयशंकर ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि वैश्विक बाजार में बढ़ते जोखिमों के बावजूद देश में तेल और गैस की उपलब्धता बनी रहे और उसकी कीमतों का असर आम नागरिकों पर कम से कम पड़े।
इस दौरान विदेश मंत्री ने सभी देशों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट का हल केवल संवाद और कूटनीति के रास्ते से ही संभव है। धैर्य बनाए रखना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है।
जयशंकर ने यह भी बताया कि भारत पहले भी इस मुद्दे पर चिंता जता चुका है। 20 फरवरी को भारत ने सभी पक्षों से तनाव कम करने और संयम बरतने की अपील की थी। लेकिन मौजूदा हालात पहले से कहीं ज्यादा गंभीर हो चुके हैं और इस संघर्ष का असर आसपास के देशों तक फैलने लगा है।
इसी मुद्दे को लेकर राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने नियम 176 के तहत ऊर्जा सुरक्षा और विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग भी की है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अब पूरी दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट पर टिकी हुई है, क्योंकि यहां की हलचल से वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार दोनों प्रभावित हो सकते हैं।









