मानसून पर संकट के बादल! इस साल 100 साल का रिकॉर्ड तोड़ सकती है गर्मी..कमजोर मानसून से सूखे जैसे हालात बन सकते हैं

EL Niño बिगाड़ सकता है बारिश का पूरा खेल

नई दिल्ली। भारत में मार्च के महीने में ही गर्मी ने अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। राजधानी New Delhi में अधिकतम तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है। वहीं Uttar Pradesh और Madhya Pradesh जैसे राज्यों में भी मार्च में ही तापमान 40 डिग्री के करीब पहुंचने लगा है, जिससे आने वाले महीनों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

अल नीनो की गतिविधि बढ़ने से बढ़ी चिंता

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रशांत महासागर में El Niño सक्रिय होने लगा है और समय के साथ इसके और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसमी बदलाव का असर भारत में गर्मी की तीव्रता और मानसून के पैटर्न पर साफ दिखाई दे सकता है।

रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का अनुमान

विशेषज्ञों के मुताबिक इस साल अल नीनो की वजह से भारत में सामान्य से कहीं ज्यादा गर्मी पड़ सकती है। कई इलाकों में तापमान पुराने रिकॉर्ड भी तोड़ सकता है।

बताया जा रहा है कि जून से अगस्त के बीच अल नीनो के और मजबूत होने की लगभग 60 प्रतिशत संभावना है और साल के अंत तक इसका असर चरम पर पहुंच सकता है।

मानसून पर भी पड़ सकता है असर

भारत का मानसून प्रशांत महासागर की गतिविधियों से काफी प्रभावित होता है। इसी वजह से India Meteorological Department और अंतरराष्ट्रीय जलवायु संस्थान महासागर की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगर अल नीनो मजबूत हुआ, तो मानसून कमजोर पड़ सकता है और खासकर अगस्त-सितंबर के दौरान वर्षा में कमी देखने को मिल सकती है।

नमी की कमी और लू का खतरा

अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से की सतह सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाती है। इससे भारत की ओर आने वाली नमी वाली हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं।

इस स्थिति में कई क्षेत्रों में लू चलने और सूखे जैसे हालात बनने की आशंका बढ़ जाती है।

क्या भारत में सूखा पड़ सकता है?

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो का असर मानसून पर जरूर पड़ सकता है, लेकिन इसका सटीक अनुमान लगाना अभी मुश्किल है। कई बार अल नीनो के बावजूद भारत में सामान्य मानसून भी देखा गया है।

हालांकि अगर शुरुआत में ही इसका प्रभाव मजबूत हो गया, तो कई राज्यों में बारिश सामान्य से कम हो सकती है। चूंकि भारत में साल भर की लगभग 70 प्रतिशत बारिश मानसून के दौरान होती है, इसलिए कम बारिश से कृषि और जल संसाधनों पर असर पड़ सकता है।

वैज्ञानिकों ने दी सावधानी बरतने की सलाह

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल लोगों को गर्मी से बचाव के लिए विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बढ़ते तापमान, संभावित सूखे और अनिश्चित मानसून का असर कृषि, जल आपूर्ति और बिजली की मांग पर पड़ सकता है।

लोगों को पर्याप्त पानी पीने, तेज धूप से बचने और किसानों को मौसम के अनुसार खेती की तैयारी करने की सलाह दी जा रही है।

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