बोकारो ट्रेजरी घोटाले में बड़ा खुलासा…10 करोड़ की मनी ट्रेल से खुली साजिश की परतें
Major Revelation in Bokaro Treasury Scam: ₹10 Crore Money Trail Uncovers Layers of the Conspiracy

रांची से सामने आए बोकारो ट्रेजरी अवैध निकासी मामले में जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे वैसे घोटाले की गहराई सामने आती जा रही है। CID की विशेष जांच टीम ने करीब 10 करोड़ रुपये की मनी ट्रेल का विश्लेषण किया है, जिससे पूरे नेटवर्क की संगठित साजिश के संकेत मिले हैं।
1.98 करोड़ की रकम फ्रीज, बैंक खातों पर कसी गई पकड़
जांच के दौरान अलग अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की गई 1 करोड़ 80 लाख रुपये की राशि और 18 लाख रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट को फ्रीज कर दिया गया है। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि एजेंसियां अब पैसों के प्रवाह को रोकने और सबूतों को सुरक्षित रखने में तेजी दिखा रही हैं।
कई खातों के जरिए घुमाया गया पैसा, सुनियोजित नेटवर्क की आशंका
SIT की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि अवैध रूप से निकाली गई राशि का सीधा उपयोग नहीं किया गया। इसे कई बैंक खातों के जरिए घुमाकर छिपाने की कोशिश की गई। इससे साफ है कि इस पूरे मामले में एक सुनियोजित नेटवर्क सक्रिय था, जो पैसे को ट्रैक से दूर रखने की रणनीति पर काम कर रहा था।
आरोपी के घर छापा, करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज जब्त
मामले में गिरफ्तार सहायक अवर निरीक्षक अशोक कुमार भंडारी के घर पर छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं। जांच में बोकारो के तेलीडीह क्षेत्र में स्थित 4.08 डिसमिल जमीन पर बने तीन मंजिला मकान और पास ही 4.98 डिसमिल जमीन से जुड़े कागजात मिले हैं, जो संपत्ति के विस्तार की ओर इशारा करते हैं।
तीन आरोपी पहले से जेल में, जांच का दायरा बढ़ा
इस घोटाले में मुख्य आरोपी कौशल कुमार पांडेय, गृहरक्षक सतीश कुमार और अशोक कुमार भंडारी को पहले ही गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। ये सभी बोकारो के पुलिस अधीक्षक कार्यालय की लेखा शाखा में तैनात थे, जहां से इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया।
आगे और बड़े खुलासों के संकेत, जांच जारी
CID की टीम अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती दौर में है और आने वाले समय में इस मामले से जुड़े और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं, जिससे घोटाले की असली तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।









