झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला…BSFC की अपील खारिज…कानूनी प्रक्रिया पर सख्त टिप्पणी

Jharkhand High Court's Major Verdict: BSFC's Appeal Dismissed; Strict Remarks on Legal Process

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने बिहार स्टेट फाइनेंशियल कॉरपोरेशन को बड़ा झटका देते हुए उसकी अपील याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि रिव्यू याचिका खारिज होने के खिलाफ अपील करना कानून के दायरे में नहीं आता।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि रिव्यू याचिका का खारिज होना कोई नया आदेश नहीं माना जाता। ऐसे में उसके खिलाफ अलग से अपील दाखिल करना उचित नहीं है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी पक्ष को आपत्ति है, तो उसे सीधे मूल आदेश के खिलाफ ही अपील करनी चाहिए।

17 मार्च को सुरक्षित रखा गया था फैसला

इस मामले में 17 मार्च को सुनवाई पूरी हो चुकी थी और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अंतिम आदेश जारी करते हुए अपील को अमान्य मानकर खारिज कर दिया गया है।

कर्मचारियों से जुड़ा है मामला

पूरा विवाद BSFC कर्मचारियों से जुड़ा है, जिन्होंने छठे वेतन आयोग का लाभ देने की मांग को लेकर अदालत का रुख किया था।

इस पर एकल पीठ ने कहा था कि यदि कॉरपोरेशन की आर्थिक स्थिति अनुमति देती है, तो वह अपने संसाधनों के आधार पर कर्मचारियों को यह लाभ दे सकता है।

प्रस्ताव पास, फिर वापस

कॉरपोरेशन के बोर्ड ने 28 जून 2019 को छठे वेतनमान लागू करने का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन बाद में 15 मई 2023 को इसे वापस ले लिया गया। संस्था का तर्क था कि उसकी वित्तीय स्थिति कमजोर है और वह इस लाभ को लागू करने में सक्षम नहीं है।

क्यों खारिज हुई अपील

BSFC ने पहले एकल पीठ के आदेश के खिलाफ रिव्यू याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद उसी रिव्यू आदेश के खिलाफ अपील की गई, जिसे हाईकोर्ट ने गैरकानूनी मानते हुए खारिज कर दिया।

आगे क्या रास्ता

अब कॉरपोरेशन के पास एकमात्र विकल्प यही बचता है कि वह मूल आदेश के खिलाफ निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनाए।

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