झारखंड हाईकोर्ट: 40 की बीबी ने खुद की उम्र बतायी 27, हाईकोर्ट पहुंची तलाक की अर्जी, कोर्ट ने कहा, शादी के पहले उम्र और क्रिमिनल रिकॉर्ड छूपाना क्रूरता, पत्नी की याचिका खारिज, तलाक मंजूर
Jharkhand High Court: A 40-year-old wife claimed her age was 27; the divorce petition reached the High Court. The court stated that concealing age and criminal record before marriage constitutes cruelty. The wife's petition was dismissed, and the divorce was granted.

रांची। शादी को लेकर चल रहे परिवारिक विवाद पर झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी में कहा है कि शादी से पहले उम्र और आपराधिक मामलों जैसी महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना पति के साथ मानसिक क्रूरता के समान है।
अदालत ने फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए तलाक के आदेश को सही ठहराते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी।
झारखंड हाई कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस एस.एन. प्रसाद और जस्टिस ए.के. राय शामिल थे, ने एक पारिवारिक विवाद से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि विवाह से पहले अपनी वास्तविक उम्र और आपराधिक पृष्ठभूमि जैसे अहम तथ्यों को छिपाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। ऐसे हालात में पति से वैवाहिक संबंध निभाने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
हाई कोर्ट ने पत्नी द्वारा दायर तलाक के खिलाफ अपील याचिका को खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें पति को तलाक देने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने कहा कि फैमिली कोर्ट का फैसला न तो मनमाना है और न ही उपलब्ध साक्ष्यों के विपरीत है, इसलिए उसमें हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं बनता।
अदालत ने अपने फैसले में यह भी रेखांकित किया कि विवाह एक विश्वास पर आधारित संबंध होता है। यदि विवाह की शुरुआत ही झूठ और तथ्यों को छिपाने के आधार पर की जाए, तो वह रिश्ते की नींव को कमजोर कर देता है।
अदालत के अनुसार, उम्र और आपराधिक पृष्ठभूमि जैसे तथ्य किसी भी व्यक्ति के जीवन से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू हैं, जिन्हें छिपाना जीवनसाथी के साथ धोखा करने के समान है और यह मानसिक क्रूरता मानी जाएगी।
यह मामला झारखंड के गुमला जिले से संबंधित है। पति ने वर्ष 2022 में फैमिली कोर्ट, गुमला में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत तलाक की याचिका दाखिल की थी।
याचिका में पति ने आरोप लगाया था कि 15 अप्रैल 2019 को हुई शादी से पहले पत्नी ने अपनी वास्तविक उम्र और आपराधिक इतिहास की जानकारी जानबूझकर छिपाई थी।
पति के अनुसार, पत्नी की वास्तविक उम्र लगभग 40 वर्ष थी, जबकि विवाह के समय उसने अपनी उम्र 27 वर्ष बताई थी। इसके अलावा, पत्नी एक हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा पा चुकी थी और उस समय जमानत पर बाहर थी। पति ने दावा किया कि पत्नी ने अपने इस आपराधिक मामले की जानकारी भी शादी से पहले नहीं दी।
पति ने यह भी आरोप लगाया कि शादी के बाद पत्नी उसे और उसके परिवार को झूठे आपराधिक मुकदमों में फंसाने की धमकी देने लगी, जिससे उसे लगातार मानसिक तनाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। इन परिस्थितियों के कारण दांपत्य जीवन पूरी तरह से टूट गया और साथ रहना असंभव हो गया।
दूसरी ओर, पत्नी ने फैमिली कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों के समक्ष पति के सभी आरोपों से इनकार किया। पत्नी का कहना था कि शादी से पहले पति को उसकी उम्र और आपराधिक मामले की पूरी जानकारी थी और इसके बावजूद उसने विवाह किया था।
पत्नी ने यह भी दलील दी कि पति झूठे आरोप लगाकर तलाक लेना चाहता है और वह अभी भी विवाह को बचाना चाहती है।
हालांकि, हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के निष्कर्षों से सहमति जताते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया था, जिससे पति को मानसिक क्रूरता झेलनी पड़ी। अदालत ने कहा कि ऐसे हालात में पति को विवाह निभाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

















