झारखंड: 9547 डाक्टर व स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी से गायब, बायोमैट्रिक अटेंडेंस नहीं बनाने वाले डाक्टरों व कर्मचारियों पर बड़े एक्शन की तैयारी, नोटिस जारी

Jharkhand: 9,547 doctors and health workers absent from duty; major action underway against doctors and staff who fail to register biometric attendance; notice issued

झारखंड के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की लगातार अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कदम उठाया है। राज्यभर के 9547 डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विभाग के अनुसार बायोमेट्रिक उपस्थिति के आंकड़ों में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं, जिसके बाद सभी जिलों को जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए हैं।

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रांची। झारखंड में करीब 10 हजार डाक्टर व स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी से गायब है। सुनकर हैरानी जरूर हो रही होगी, लेकिन ये हकीकत है। दरअसल प्रदेश के 9547 डाक्टर व स्वास्थ्यकर्मी का अटेंडेंस स्वास्थ्य विभाग की नजर में गायब है। मतलब ये कर्मचारी ड्यूटी पर आ रहे हैं या नहीं, इसका अधिकृत आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। ऐसे में अब स्वास्थ्य विभाग ने सभी अनुपस्थित स्वास्थ्यकर्मियों को नोटिस भेजा है।

 

झारखंड के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की अनुपस्थिति को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर में कार्यरत कुल 9547 डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई बायोमेट्रिक उपस्थिति के आधार पर की गई है, जिसमें बड़ी संख्या में डॉक्टरों और कर्मियों की नियमित उपस्थिति दर्ज नहीं पाई गई।

 

आंकड़ों के अनुसार, नोटिस पाने वाले 4468 डॉक्टर और कर्मचारी ऐसे हैं जिनकी जनवरी महीने में एक भी बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं हुई। यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय मानी जा रही है, क्योंकि डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की अनुपस्थिति का सीधा असर मरीजों के इलाज और अस्पतालों की सेवाओं पर पड़ता है।

 

चौकाने वाली बात ये है कि इसके अलावा 579 ऐसे कर्मचारी भी पाए गए हैं जिनकी उपस्थिति 50 प्रतिशत से भी कम रही। वहीं आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि जनवरी महीने में केवल 24 प्रतिशत डॉक्टर और 31 प्रतिशत मेडिकल कर्मी ही ऐसे थे जिनकी उपस्थिति 75 प्रतिशत या उससे अधिक दर्ज की गई। इन आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग को हैरान कर दिया है।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव विद्यानंद शर्मा ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को पत्र जारी कर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने निर्देश दिया है कि ड्यूटी से लगातार अनुपस्थित रहने वाले डॉक्टरों और कर्मियों से तत्काल स्पष्टीकरण लिया जाए और उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाए।

 

अपर सचिव ने अपने पत्र में यह भी सवाल उठाया है कि इतने बड़े स्तर पर अनुपस्थिति होने के बावजूद अब तक संबंधित डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने सभी जिलों के अधिकारियों से इस मामले में स्पष्ट जवाब मांगा है और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं।

 

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की मौजूदगी बेहद जरूरी है, क्योंकि यहां गरीब और जरूरतमंद लोग इलाज के लिए आते हैं। यदि डॉक्टर और कर्मचारी ड्यूटी से गायब रहते हैं तो इसका सीधा असर मरीजों की जान पर पड़ सकता है।विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को और सख्ती से लागू किया जाएगा और नियमित निगरानी की जाएगी ताकि अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर तरीके से संचालित हो सकें।

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