रांची। …तो क्या मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बाद झारखंड में भी तख्ता पलट हो जायेगा ? …ये सवाल भी है और सस्पेंस भी। सवाल इसलिए क्योंकि, हालिया राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस विधायक दल बागी बनने के संकेत दे गया। आंकड़े बता रहे हैं कि राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस के 9 विधायकों ने बागी बनकर यशवंत सिन्हा के बजाय द्रौपदी मुर्मू को वोट दे दिये। ऐसे में बागी तेवर कहीं सत्ता को तो डगमगा देंगे। झाऱखंड में 81 विधानसभा सीट है। राष्ट्रपति चुनाव में कुल 80 विधायकों ने मतदान का प्रयोग किया, जिसमें से 1 वोट अवैध हो गये। 79 वोट में से द्रौपदी मुर्मू को 70 विधायकों का झारखंड में सपोर्ट मिला, जबकि यशवंत सिन्हा को सिर्फ 10 विधायकों का ही समर्थन मिला।

आंकड़ों से साफ है कि राज्य में जमकर क्रास वोट हुई।  आंकड़ों के मुताबिक भाजपा, आजसू, झामुमो, एनसीपी और दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन के साथ 60 विधायकों को वोट राजग के पाले में जाना था। जबकि कांग्रेस, राजद और माले को मिलाकर यूपीए के समर्थन से कुल 20 विधायकों का वोट यशवंत सिन्हा को मिलना था, लेकिन यशवंत सिन्हा को सिर्फ 9 वोट मिले। मतलब उम्मीद से 11 वोट यूपीए के झारखंड में कम हो गये। हैरानी की बात ये कि क्रास वोटिंग सबसे ज्यादा कांग्रेस के खेमे मे ही हुआ।

बीजेपी इस तरह पहुंच सकती है सत्ता में

झारखंड विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखें तो कांग्रेस के 18 विधायक जीतकर आये हैं। 30 विधायक JMM के है। सरकार बनाने में झारखंड मुक्ति मोर्चा का कांग्रेस समर्थन कर रही है। वहीं मुख्य विपक्षी दल भाजपा के पास 26 विधायक हैं। भाजपा के सहयोगी दल आजसू के 2 विधायक हैं। इस तरह देखा जाए तो एनडीए के पास कुल 28 विधायक इस समय मौजूद हैं। सदन में एनसीपी और भाकपा माले के क्रमश: एक एक विधायक और 2 निर्दलीय विधायक हैं। अगर कांग्रेस के दस विधायक टूटकर भाजपा में मिलते हैं तो एनडीए विधायकों की संख्या 38 हो जाएगी। ऐसे में निर्दलीय विधायकों को समर्थन भी भाजपा को मिल सकता है। तब यह संख्या 40 तक पहुंच सकती है। ऐसे में भाजपा के लिए सरकार बनाने की राह बेहद आसान हो सकती है।

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