CM नीतीश के कार्यक्रमों में ‘साइलेंट मोड’ लागू! अब सिर्फ 3 लोगों को लेटर, मीडिया और लाइव कैमरे पूरी तरह OUT
हिजाब विवाद के बाद बदली सत्ता की चाल—मुख्यमंत्री के मंच से कैमरे गायब, सवाल उठे: आखिर किससे डर रही है सरकार?

पटना।बिहार की राजनीति में कुछ बड़ा बदल रहा है—और यह बदलाव अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यक्रमों में साफ दिखाई देने लगा है। 15 दिसंबर को नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान एक महिला डॉक्टर के हिजाब को लेकर उठे विवाद के बाद से सीएम के सार्वजनिक कार्यक्रमों का पूरा पैटर्न ही बदल दिया गया है।
अब न तो मीडिया को एंट्री मिल रही है, न ही लाइव स्ट्रीमिंग हो रही है, और सबसे चौंकाने वाली बात—हजारों अभ्यर्थियों के बीच मुख्यमंत्री सिर्फ तीन लोगों को ही नियुक्ति पत्र दे रहे हैं। बाकी सब कुछ कैमरों से दूर, बंद दरवाजों के पीछे।
बोधगया में दिखा बदला-बदला अंदाज
बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बोधगया पहुंचे। महाबोधि मंदिर में भगवान बुद्ध के दर्शन किए, लेकिन कैमरों के सामने रुकने के बजाय दूर से इशारा कर आगे बढ़ गए।
इसके बाद गया में बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) की दो दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन हुआ। संवाद वाटिका, नक्षत्र वन, ब्रह्मयोनि सरोवर के पुनर्जीवन, मोटर ड्राइविंग स्कूल और स्पेस गैलरी का शिलान्यास भी किया गया—लेकिन मीडिया को मौके पर जाने की अनुमति नहीं थी।
इन सभी कार्यक्रमों के वीडियो और तस्वीरें सरकार ने बाद में खुद जारी कीं।
नियुक्ति पत्र वितरण में ‘सिर्फ नाम का कार्यक्रम’
ऊर्जा विभाग के तहत बिहार स्टेट पावर (होल्डिंग) कंपनी लिमिटेड और सहयोगी कंपनियों में चयनित 2390 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाना था।
लेकिन मंच पर मुख्यमंत्री ने सिर्फ तीन अभ्यर्थियों को ही प्रतीकात्मक रूप से नियुक्ति पत्र सौंपे। बाकी नियुक्ति पत्र अधिकारियों ने बांटे।
राजनीतिक गलियारों में इसे सिर्फ औपचारिक बदलाव नहीं, बल्कि सत्ता की नई रणनीति माना जा रहा है।
CM के कार्यक्रम का नया ‘नो रिस्क’ पैटर्न
हिजाब विवाद के बाद लगातार दो कार्यक्रमों में तीन बड़े बदलाव साफ नजर आए—
सीमित भागीदारी, सीमित मंच
अब बड़े आयोजनों में मुख्यमंत्री सीधे लाभार्थियों से संवाद नहीं करेंगे। मंच पर कम लोग, कम समय और ज्यादा नियंत्रण—यही नया फॉर्मूला है।
मीडिया की पूरी तरह नो-एंट्री
सरकार भले ही अगले पांच साल में एक करोड़ नौकरी-रोजगार देने का दावा कर रही हो, लेकिन कार्यक्रमों में न मीडिया को बुलाया जा रहा है, न प्रेस ब्रीफिंग हो रही है।
सूत्रों का कहना है कि विवाद से बचने के लिए आगे भी यही मॉडल अपनाया जाएगा।
लाइव स्ट्रीमिंग पर ताला
आईपीआरडी हो या पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट—कहीं भी सीएम के कार्यक्रमों की लाइव स्ट्रीमिंग नहीं की गई।
अब सिर्फ एडिटेड वीडियो और चुनिंदा तस्वीरें ही जनता के सामने लाई जा रही हैं।
बड़ा सवाल
क्या यह सिर्फ एक प्रशासनिक एहतियात है,
या फिर सरकार अब सवालों और कैमरों से दूरी बनाना चाहती है?
नीतीश कुमार के कार्यक्रमों में आया यह “साइलेंट मोड” बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों का बड़ा संकेत माना जा रहा है।


















