झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: रिटायर्ड कर्मचारियों को चार सप्ताह के भीतर पेंशन भुगतान का आदेश, हाईकोर्ट ने कहा, अवहेलना हुई, तो सचिव-आयुक्त को होना होगा पेश

Jharkhand High Court issues major ruling: Orders pension payments to retired employees within four weeks; High Court says, if disregarded, Secretary-Commissioner will have to appear

झारखंड हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मियों की पेंशन चार सप्ताह के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया है। आदेश की अवहेलना पर नगर विकास सचिव और निगम आयुक्त को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की चेतावनी दी गई है।
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रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने रिटायर्ड कर्मचारियों से जुड़ी एक याचिका पर बड़ा फैसला सुनाया है। Jharkhand High Court ने रांची नगर निगम के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस दीपक रोशन की बेंच ने निगम को को कड़ा निर्देश दिया है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनकी पेंशन का भुगतान चार सप्ताह के भीतर सुनिश्चित किया जाए।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर पेंशन का भुगतान नहीं किया गया, तो नगर विकास विभाग के सचिव और नगर निगम आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा। कोर्ट का यह रुख प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा संदेश माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2012 में हाई कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि सेवानिवृत्त कर्मियों को उनकी रिटायरमेंट की तिथि से ही पेंशन का भुगतान किया जाए। लेकिन इसके बावजूद रांची नगर निगम ने इस आदेश का पालन नहीं किया और वर्ष 2017 से पेंशन देने का निर्णय लिया, जो कोर्ट के निर्देशों के विपरीत था।

निगम के इस फैसले से असंतुष्ट होकर अवध बिहारी तिवारी एवं अन्य सेवानिवृत्त कर्मियों ने वर्ष 2018 में फिर से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने दोबारा स्पष्ट किया कि पेंशन का भुगतान रिटायरमेंट की तारीख से ही किया जाना चाहिए। इसके बावजूद आज तक सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनका बकाया एरियर नहीं मिला है।

लंबे समय तक आदेश का पालन नहीं होने पर प्रार्थियों ने अदालत में अवमानना याचिका दायर की। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने अब सख्त रुख अपनाया है और चार सप्ताह के भीतर भुगतान का अंतिम मौका दिया है।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर सरकारी विभागों में आदेशों के अनुपालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेवानिवृत्त कर्मचारी, जो वर्षों तक सेवा देने के बाद अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उन्हें न्याय मिलने में देरी होना प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

  1. अब इस मामले की अगली सुनवाई 1 मई को निर्धारित की गई है। सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि रांची नगर निगम अदालत के आदेश का पालन करता है या फिर अधिकारियों को कोर्ट में पेश होना पड़ता है।

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