झारखंड सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका! बिजली ड्यूटी पर 2021 का नियम रद्द, जानें अब उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर

Jharkhand High Court deals a major blow to the government! The 2021 electricity duty rules have been repealed, and consumers will now be affected.

Electricity Duty Judgment के तहत झारखंड हाईकोर्ट ने बिजली उपभोक्ताओं और कैप्टिव पावर प्लांट्स (CPP) को बड़ी राहत दी है। अदालत ने झारखंड बिजली ड्यूटी संशोधन अधिनियम 2021 के पहले संशोधन और उससे जुड़े नियमों को असंवैधानिक घोषित कर दिया। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि बिजली ड्यूटी केवल खपत की गई यूनिट के आधार पर ही लगाई जा सकती है, न कि नेट एनर्जी चार्ज के प्रतिशत पर। साथ ही, उपभोक्ताओं को वसूली गई अतिरिक्त राशि लौटाने का भी निर्देश दिया गया है।

यह फैसला चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनाया। मेसर्स पाली हिल्स ब्रेवरीज प्राइवेट लिमिटेड सहित एक दर्जन से अधिक याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि राज्य सरकार का यह प्रावधान मूल अधिनियम की भावना के खिलाफ है और इससे उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ा।

Electricity Duty Judgment में अदालत ने बताया कि पहले बिजली ड्यूटी पांच पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से ली जाती थी। लेकिन 2021 के संशोधन के बाद इसे नेट एनर्जी चार्ज के प्रतिशत के रूप में लागू कर दिया गया, जिससे ड्यूटी कई गुना बढ़ गई। उदाहरण के तौर पर, जुलाई 2021 में 1,10,136 यूनिट बिजली खपत पर जहां पहले लगभग 5,506 रुपये ड्यूटी बनती थी, वहीं संशोधन के बाद यह बढ़कर 55,556 रुपये हो गई। इसे अदालत ने लगभग एक हजार प्रतिशत की अनुचित वृद्धि माना।

हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि झारखंड इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी संशोधन अधिनियम 2022 यानी दूसरा संशोधन मूल कानून के अनुरूप है और वैध रहेगा। अदालत ने निर्देश दिया कि 2021 के पहले संशोधन के तहत जारी सभी बिल रद्द माने जाएंगे। वसूली गई राशि को भविष्य की देनदारियों में समायोजित किया जाएगा या उपभोक्ताओं के आगामी बिजली बिलों में रिफंड के रूप में जोड़ा जाएगा।

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