होलिका के राख का है खास महत्व: इस बार होलिका पर कई संयोग, जानिये शुभ मुहूर्त, होलिका दहन के दौरान किन वस्तुओं को करें अर्पित
Holika's ashes hold special significance: This year, there are many coincidences associated with Holika, including the auspicious time and offerings during Holika Dahan.

इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा पर मघा नक्षत्र और सुकर्मा योग के विशेष संयोग में होलिका दहन किया जाएगा। भद्रा के पुण्य काल में देर रात 12:50 बजे से 2:02 बजे तक दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। पूर्णिमा तिथि दो दिन रहने के कारण 4 मार्च को रंगों की होली मनाई जाएगी।
________________________________________
Holika Dahan : इस वर्ष होलिका दहन विशेष ज्योतिषीय संयोगों के बीच संपन्न होगा। इस बार होलिका दहन खास संयोगों के साथ मनेगा। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा पर मघा नक्षत्र और सुकर्मा योग का शुभ मेल बन रहा है, जिसे अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। भद्रा के पुण्य काल में सोमवार देर रात 12:50 बजे से 2:02 बजे के बीच पूर्णिमा तिथि में होलिका दहन का उत्तम मुहूर्त है।
चूंकि पूर्णिमा तिथि दो दिनों तक रहेगी, इसलिए रंगों का पर्व होली 4 मार्च को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।होलिका दहन से पहले श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे। मान्यता है कि इस पावन अवसर पर व्यक्ति अपने भीतर के राग-द्वेष, क्लेश और दुखों को होलिका की अग्नि में समर्पित कर उनके नाश की प्रार्थना करता है। पूजा में अक्षत, गंगाजल, रोली-चंदन, मौली, हल्दी, दीपक और मिष्ठान अर्पित किए जाते हैं।
इसके बाद आटा, गुड़, कर्पूर, तिल, धूप, गुग्गुल, जौ, आम की लकड़ी और गोबर के उपले अग्नि में समर्पित कर सात बार परिक्रमा की परंपरा निभाई जाती है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधिवत होलिका दहन से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। दहन के बाद चना या गेहूं की बाली भूनकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा भी प्रचलित है। इसे नई फसल के आगमन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
शास्त्रों में होलिका दहन की भस्म का विशेष महत्व बताया गया है। होली के दिन इस भस्म का टीका लगाने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और घर में माता अन्नपूर्णा की कृपा बनी रहती है। इसे आध्यात्मिक शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है।होलिका पूजन में अर्पित की जाने वाली सामग्रियों का भी अपना विशेष महत्व है। गोबर के उपले नकारात्मक ऊर्जा के ह्रास का प्रतीक हैं, लौंग अनिष्ट ग्रहों के प्रभाव को कम करती है।
बताशा और चीनी सुख-समृद्धि का संकेत देते हैं, जबकि गुड़-शक्कर को कर्ज मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। इलायची बुद्धि को प्रखर करने, हल्दी वैवाहिक सुख, चंदन की लकड़ी भौतिक उन्नति, काला तिल शत्रुओं से शांति, कर्पूर मानसिक शांति और आम की लकड़ी नकारात्मकता के नाश का प्रतीक मानी जाती है।
होलिका दहन असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। भक्त प्रह्लाद की अटूट आस्था और ईश्वर कृपा की कथा अहंकार और अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश देती है। अग्नि को शुद्धि का प्रतीक मानते हुए इस दिन बुराइयों और नकारात्मकता का दहन किया जाता है, जो आत्मिक शुद्धि और नवजीवन की प्रेरणा देता है।
अलग-अलग समुदाय अपनी-अपनी परंपराओं के अनुसार होलिका पूजन करते हैं। मारवाड़ी समाज में महिलाएं पारंपरिक रीति से पूजा करती हैं, मराठी समाज घर-घर से लकड़ी और गोइठा लाकर होलिका सजाता है तथा नारियल और पूरन पोली का नैवेद्य अर्पित करता है। जैन समाज तीर्थ स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना करता है। गांवों में सुबह कीचड़ की होली और शाम को गुलाल लगाकर सौहार्द का संदेश देने की परंपरा निभाई जाती है।









