क्या सस्ते होंगे साबुन-तेल और बिस्किट? FMCG कंपनियों के संकेतों ने जगाई उम्मीद

कच्चे माल की कीमतों में नरमी… क्या अब कम होगा रोजमर्रा की चीजों का बोझ?

महंगाई से जूझ रहे आम उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। रोजमर्रा की जरूरत की चीजें—जैसे साबुन, खाने का तेल, बिस्किट और पैक्ड फूड—क्या आने वाले महीनों में सस्ते हो सकते हैं? देश की बड़ी FMCG कंपनियों के ताजा बयानों से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि कीमतों पर दबाव अब कम पड़ सकता है

 कच्चा माल सस्ता… तो क्या मिलेगा फायदा?

पिछले कुछ महीनों में खाद्य तेल, गेहूं, नारियल और अहम केमिकल्स की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने कंपनियों की लागत बढ़ा दी थी। इसी वजह से कई उत्पादों के दाम बढ़े थे या पैकेजिंग साइज कम किए गए थे।

लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है।
कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों में नरमी आई है, जिससे उत्पादन लागत पर दबाव कम हुआ है।

अगर यह रुझान जारी रहता है, तो कंपनियों को दाम बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी—बल्कि कुछ मामलों में उपभोक्ताओं को राहत भी मिल सकती है।

 दाम नहीं, बिक्री बढ़ाने पर फोकस

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अगले वित्त वर्ष में कंपनियां कीमत बढ़ाने की बजाय वॉल्यूम ग्रोथ (बिक्री की मात्रा) पर जोर देंगी।

अच्छी फसल, बढ़ा हुआ MSP और जीएसटी में संभावित सुधार से ग्रामीण और शहरी बाजार में मांग बढ़ने की उम्मीद है। अगर मांग मजबूत रहती है, तो कंपनियां ज्यादा बिक्री से ही मुनाफा बढ़ाने की रणनीति अपना सकती हैं।

 कंपनियों के संकेत क्या कहते हैं?

Dabur India के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा है कि महंगाई धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रही है और कुछ कच्चे माल की कीमतें घटी हैं।

वहीं Marico और Britannia Industries के प्रबंधन ने भी संकेत दिए हैं कि फिलहाल कीमतें स्थिर हैं और मांग में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।

इन बयानों से बाजार में उम्मीद जगी है कि आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिल सकती है।

 लेकिन तुरंत बड़ी कटौती? अभी इंतजार

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि तुरंत बड़े पैमाने पर कीमतों में कटौती की उम्मीद करना जल्दबाज़ी होगी।

फिलहाल साफ है कि अगर कच्चे माल की कीमतें नियंत्रित रहीं और मांग मजबूत बनी रही, तो महंगाई का दबाव कम हो सकता है और रोजमर्रा की चीजों के दाम स्थिर या थोड़े कम हो सकते हैं।

अब सबकी नजर आने वाले तिमाही नतीजों और बाजार के रुझानों पर टिकी है—
क्या सच में आपकी किराना बिल में राहत मिलने वाली है?

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