मौत का दूध! 48 घंटे में 4 लाशें…मिलावटी दूध पीते ही बिगड़ी तबीयत..गुर्दे फेल होने से गई जान…

आंध्र के राजमहेंद्रवरम में मचा हड़कंप...सीएम नायडू ने बुलाई हाई-लेवल बैठक

मौत का दूध! 48 घंटे में 4 लाशें…मिलावटी दूध पीते ही बिगड़ी तबीयत..गुर्दे फेल होने से गई जान…

आंध्र प्रदेश के Rajamahendravaram (राजमहेंद्रवरम) से एक ऐसी खौफनाक खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। पिछले 48 घंटों में मिलावटी दूध के सेवन से चार लोगों की मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि यह दूध एक अनाधिकृत स्थानीय विक्रेता द्वारा सप्लाई किया जा रहा था। दो लोगों की मौत रविवार को हुई, जबकि दो अन्य ने सोमवार को दम तोड़ दिया।

 दूध या जहर? शुरुआती जांच में चौंकाने वाला खुलासा

राजमहेंद्रवरम उत्तर जोन के डीएसपी वाई श्रीकांत ने बताया कि प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि दूषित दूध पीने से पीड़ितों के गुर्दे अचानक खराब हो गए
किडनी फेल होने के कारण मूत्र मार्ग में रुकावट आई और हालात इतने बिगड़ गए कि उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

सभी मृतकों ने एक ही स्थानीय विक्रेता से दूध खरीदा था, जो घर-घर सप्लाई करता था। बताया जा रहा है कि वह करीब 40 पशुओं और स्थानीय किसानों से दूध इकट्ठा कर आगे वितरित करता था।

 106 परिवारों तक पहुंचा था दूध

अधिकारियों के अनुसार, कुल 106 परिवारों को यह दूध सप्लाई किया गया था, जिनमें से 75 लोगों के नमूने जांच के लिए लिए गए हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने दूध के सैंपल जब्त कर अलग-अलग प्रयोगशालाओं में भेज दिए हैं।

इलाके में मेडिकल कैंप लगाए गए हैं और घर-घर स्वास्थ्य निगरानी की जा रही है ताकि और किसी की तबीयत न बिगड़े।

सीएम एन. चंद्रबाबू नायडू एक्शन में

घटना की गंभीरता को देखते हुए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने सोमवार को आपात समीक्षा बैठक बुलाई।

अधिकारियों ने उन्हें जमीनी स्तर पर चल रहे मेडिकल कैंप, त्वरित जांच और इलाज की व्यवस्थाओं की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए कि:

  • इलाज करा रहे लोगों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा दी जाए

  • दोषी विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए

  • मिलावटखोरी पर तत्काल रोक लगाने के लिए व्यापक जांच अभियान चलाया जाए

अब बड़ा सवाल…

क्या यह सिर्फ लापरवाही है या कोई संगठित मिलावट रैकेट?
चार मौतों के बाद पूरा शहर सहमा हुआ है।

फिलहाल जांच जारी है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है —
क्या हम जो रोजाना दूध पीते हैं, वह सच में सुरक्षित है?

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