स्कूल बस के सामने मौत बनकर आया कैंटर… 60 साल के ड्राइवर ने खुद कुर्बान होकर…ऐसा बलिदान जिसे सुनकर आंखें नम हो जाएंगी….

मुरैना (मध्य प्रदेश): एक पल की देरी और 22 घरों में मातम छा सकता था… लेकिन एक बहादुर स्कूल बस ड्राइवर ने अपनी जान दांव पर लगाकर ऐसा फैसला लिया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। मुरैना के बागचीनी थाना क्षेत्र के नीवरी गांव के पास आज सुबह हुए इस दर्दनाक हादसे में स्कूल बस चालक सरनाम सिकरवार (60) ने बच्चों को बचाने के लिए खुद को मौत के हवाले कर दिया।

 जब सामने से मौत दौड़ती चली आई

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सरनाम सिकरवार रोज़ की तरह सुबह बच्चों को लेकर स्कूल जा रहे थे। तभी अचानक सामने से एक बेकाबू और तेज रफ्तार कैंटर बस की ओर बढ़ता नजर आया। खतरे को भांपते ही इस बुजुर्ग चालक ने बिना एक पल सोचे बस को सड़क के किनारे मोड़ दिया

सीधी टक्कर तो टल गई…
लेकिन यह फैसला उनकी जिंदगी की कीमत पर पड़ा

 सीने में लगी गंभीर चोट, मौके पर ही मौत

बस को बचाने के दौरान चालक के सीने में गंभीर चोट आई और सरनाम सिकरवार ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। उनकी इस कुर्बानी की वजह से बस में सवार करीब 22 बच्चों की जान बच गई। हादसे में 6 बच्चों को मामूली चोटें आईं, जिन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया और इलाज के बाद सुरक्षित घर भेज दिया गया।

 बस में थे अपने ही पोते-पोतियां

इस हादसे को और भी भावुक बना देने वाली बात यह है कि बस में सरनाम के अपने तीन पोते-पोतियां, उनके छोटे भाई के बच्चे और गांव के अन्य छात्र भी सवार थे। 15 साल से स्कूल वैन चला रहे सरनाम ने अंतिम सांस तक बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाई।

 पुलिस जांच में जुटी, कैंटर चालक पर केस दर्ज

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। उम्मेदगढ़ वांसी की पुलिया के पास हुए इस एक्सीडेंट की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने कैंटर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

 इलाके में शोक, हर जुबां पर एक ही नाम

ग्रामीणों का कहना है कि अगर सरनाम समय रहते बस को किनारे नहीं मोड़ते, तो हादसा भयानक नरसंहार में बदल सकता था। आज पूरा इलाका उस शख्स को सलाम कर रहा है, जिसने
 खुद मरकर 22 जिंदगियों को जिंदगी दे दी।

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