“झारखंड में कामकाजी महिलाओं के लिए 500-बेड हॉस्टल…जानें क्या-क्या सुविधाएँ मिलेंगी और कहाँ-कहाँ बनेंगे
Jharkhand to have 500-bed hostels for working women... Find out what facilities will be available and where they will be built.

झारखंड की कामकाजी महिलाओं को पीजी या निजी हॉस्टल में भारी भरकम फीस भरने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा. जी हां! आप सही सुन रहे है. हेमंत सोरेन सरकार वर्किंग वूमन के लिए बड़ी पहल करने जा रही है.अब कामकाजी महिलाएं बहुत कम किराए पर सुरक्षित माहौल में अपने दफ्तर के नजदीक रहकर ही काम कर सकेंगी. वर्किंग वूमन हॉस्टल का निर्माण कई चरणों में पूरा होगा. चलिए जानते हैं कि वर्किंग वूमन हॉस्टल बनाने में कितनी लागत आएगी. पहले चरण में कहां हॉस्टल बनेगा. इन छात्रावासों में महिलाओं को क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी. इनकी खासियत क्या होगी और महिलाओं को कितना किराया व्यय करना होगा.
500 -500 बेड का बनेगा हॉस्टल
झारखंड सरकार वर्किंग वूमन के लिए पहले चरण में 5 जिलों में 500-500 बेड का हॉस्टल बनाने जा रही है. पहले चरण में बनने वाले हॉस्टल में कुल 118 करोड़ रुपये खर्च होंगे. जानकारी के अनुसार, पहले चरण में रांची, गिरिडीह, हजारीबाग, जमेशदपुर एवं बोकारो में महिलाओं के लिए हॉस्टल बनाया जाएगा. इसके बाद धनबाद और देवघर समेत 4 और जिलों में हॉस्टल बनाए जाएंगे. 1 वर्किंग वूमन हॉस्टल के निर्माण पर करीब 24 करोड़ रुपये खर्च होंगे. झारखंड के श्रम, उद्योग एवं कौशल विकास मंत्री संजय प्रसाद यादव ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है.
गौरतलब है कि केंद्र सरकार के गाइलाइन के अनुसार इन छात्रावासों के निर्माण के लिए राज्य सरकार निःशुल्क भूमि उपल्बध कराएगी. सरकारी जमीन उपल्बध नहीं होने पर राज्य सरकार उक्त जमीन का मूल्य वहन करेगी. पांच छात्रावास के लिए झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार द्वारा स्थल भी चिन्हित किये गये हैं. इन हॉस्टलों का निर्माण केंद्र सरकार के स्पेशल असिस्टेंट टू स्टेट फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट के तहत हो
पहले चरण में खर्च होंगे 118 करोड़ रुपये
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार राज्यों को 50 वर्ष के लिए ब्याज मुक्त ऋण दे रही है. झारखंड को 163 करोड़ में से पहले चरण में बनने वाले 5 कामकाजी महिला छात्रावास पर करीब 118 करोड़ रूपये खर्च होंगे. इसके निर्माण के लिए झारखंड औद्योगिक आधारभूत संरचना विकास निगम ने तकनीकी स्वीकृति के साथ –साख डीपीआर भी उपलब्ध करा दिया है.
इस परियोजना के पूरा होने के बाद संपत्ति का स्वामित्व उद्योग विभाग के अधीन होगा. जबकि रखरखाव की जिम्मेदारी जियाडा की होगी.
औद्योगिक क्षेत्र वाले इलाकों में इन हॉस्टलों के निर्माण की रूपरेखा तय की गई है ताकि संबंधित और आसपास के जिलों में विभिन्न कारखाने व कार्यालय में काम करने वाली महिलाओं के लिए रहने की बेहतर व्यवस्था हो सके.
क्या है उद्देश्य?
इसका उद्देश्य श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना भी है. महिलाओं की भागीदारी दर बढ़ाने के लिए बेहतर स्थिति और अनुकूल तंत्र विकसित होना जरूरी है. इसके अलावा महिलाओं के जीवन स्तर को बेहतर एवं आसान बनाने के उद्देश्य से भी इन हॉस्टलों का निर्माण किया जा रहा है. ह़ॉस्टल कार्यस्थल के करीब होगा ताकि कामकाजी महिलाओं को रोजाना आने जाने में सुविधा हो. उसमें सुरक्षा के लिए सीसीटीवी रहेगी. सिंगल व शेयरिंग का कमरा रहेगा. रियायती दर पर मासिक किराया तय होगा. अन्य चार्ज भी रियायती दर पर ही होंगी.r
बहरहाल, अब जो महिलाएं नौकरी के लिए शहरों में रहती हैं और पीजी या प्राइवेट हॉस्टलों में भारी-भरकम किराया चुकाती हैं, उन्हें जल्द ही इस समस्या से राहत मिलेगी. हालांकि यह देखना होगा कि कामकाजी महिलाओं के लिए बनने वाले हॉस्टल कब तक बनकर तैयार होते हैं









