4 दिन नर्क में… और फिर लाश पर छोड़ा नोट! 25 साल की सरला भट्ट की दहला देने वाली दास्तान…
जिन हाथों ने जख्मों पर मरहम रखा, उन्हीं पर कहर बनकर टूटे आतंकी। सरला भट्ट – एक नर्स, एक बेटी, एक इंसान... और फिर एक शिकार।

जिन हाथों ने जख्मों पर मरहम रखा, उन्हीं पर कहर बनकर टूटे आतंकी।
सरला भट्ट – एक नर्स, एक बेटी, एक इंसान… और फिर एक शिकार।
कश्मीर 1990 – जब जिंदा जल रहा था इंसानियत का चेहरा
अनंतनाग की रहने वाली कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट, श्रीनगर के SKIMS अस्पताल में मरीजों की सेवा में दिन-रात जुटी रहती थीं।
लेकिन यह वही दौर था जब आतंकवाद कश्मीरियत को लहूलुहान कर रहा था।
हिंदुओं को मस्जिदों से धमकियाँ दी जा रही थीं – रालिव, गालिव या चालिव (धर्म बदलो, भागो या मरो)।
14 अप्रैल 1990 – एक नर्स को उठा ले गए आतंकी
JKLF के आतंकी यासीन मलिक गुट के सदस्य सरला को अस्पताल के हॉस्टल से किडनैप कर ले गए।
4 दिनों तक गैंगरेप, अमानवीय यातनाएँ और फिर बेरहमी से हत्या।
19 अप्रैल को श्रीनगर डाउनटाउन में एक क्षत-विक्षत लाश मिली – सरला भट्ट की।
लाश के पास एक नोट – “यह पुलिस की मुखबिर थी।”
एक लाश, एक धमाका, और फिर एक जला हुआ घर
जब परिवार शव लेकर अंतिम संस्कार के लिए निकला, आतंकियों ने उन पर बम फेंका।
इसके बाद सरला के घर को आग लगा दी गई।
परिवार ने कश्मीर छोड़ने का फैसला किया – और साथ लेकर गए एक बेजुबान, पर जिंदा सवाल – इंसाफ कब मिलेगा?
12 अगस्त 2025 – 35 साल बाद फिर खुला केस
NIA ने JKLF के पूर्व प्रमुख यासीन मलिक के घर पर छापा मारा।
JKLF से जुड़े कई अन्य आतंकियों के ठिकानों की भी तलाशी हुई।
एयर मार्शल उर्फ पीर नूरुल हक शाह का नाम भी जांच के घेरे में आया है।
सरला भट्ट की दर्दनाक हत्या को अब नए सिरे से खोला गया है।
एक नहीं, कई ज़ख्म — गिरिजा टिक्कू की भी थी यही कहानी
सरला की हत्या से कुछ ही दिन पहले, श्रीनगर में गिरिजा टिक्कू को भी आतंकियों ने गैंगरेप के बाद लकड़ी काटने वाली मशीन से जिंदा काट दिया था। ये कहानियाँ सिर्फ कागज़ की इंक नहीं, इंसानियत पर लगे ज़ख्म हैं।