लखनऊ में सियासी गुप्त मंत्रणा! मिशन 2027 से पहले योगी-भागवत की बंद कमरे में बैठक, तय होगा चुनावी रोडमैप?
यूपी चुनाव से पहले संघ और सरकार की बड़ी रणनीति? 3 अहम मुद्दों पर हो सकती है निर्णायक चर्चा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। 2027 के विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन सत्ता और संगठन के गलियारों में तैयारियां तेज होती दिख रही हैं। इसी बीच मोहन भागवत और योगी आदित्यनाथ की प्रस्तावित मुलाकात ने सियासी पारा चढ़ा दिया है।
सूत्रों के मुताबिक बुधवार (18 फरवरी) की शाम दोनों दिग्गजों की लखनऊ में अहम बैठक हो सकती है। माना जा रहा है कि यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि ‘मिशन 2027’ की रणनीति का खाका तय करने वाली हो सकती है।
शताब्दी कार्यक्रम के बीच सियासी संकेत
संघ प्रमुख इन दिनों उत्तर प्रदेश के प्रवास पर हैं। गोरखपुर के बाद वह लखनऊ पहुंचे, जहां शताब्दी वर्ष कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत विभिन्न बैठकों और संवाद कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में भागवत ने हिंदू समाज से संगठित और सशक्त बनने का आह्वान किया।
इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात अयोध्या में राम मंदिर के धर्म ध्वजा समारोह के दौरान हुई थी, लेकिन उस बातचीत का कोई आधिकारिक ब्योरा सामने नहीं आया था। अब लखनऊ की यह बैठक कई सवाल खड़े कर रही है।
एजेंडे में रह सकती हैं ये 3 बड़ी बातें
संगठन की मजबूती और चुनावी मुद्दे
सूत्रों का दावा है कि प्रदेश में बीजेपी संगठन को और मजबूत करने तथा 2027 के चुनाव में किन मुद्दों को केंद्र में रखकर मैदान में उतरा जाए—इस पर चर्चा हो सकती है।
संघ-बीजेपी समन्वय का ब्लूप्रिंट
यह भी संभावना जताई जा रही है कि संघ और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच जमीनी स्तर पर बेहतर तालमेल कैसे स्थापित हो, इस पर रणनीति बने। महाराष्ट्र और बिहार चुनावों में संघ कार्यकर्ताओं की सक्रियता का फायदा बीजेपी को मिला था—उसी मॉडल पर यूपी में काम हो सकता है।
सामाजिक समरसता और वैचारिक एजेंडा
संघ इन दिनों संगठन विस्तार और सामाजिक समरसता पर विशेष फोकस कर रहा है। ‘घर वापसी’ और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर भी स्पष्ट रुख जाहिर किया गया है। माना जा रहा है कि इन विषयों पर भी चर्चा हो सकती है।
क्यों अहम मानी जा रही यह मुलाकात?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के चुनाव से पहले सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी होगा। ऐसे में यह बैठक भविष्य की रणनीति को दिशा दे सकती है।
सूत्रों के अनुसार, आने वाले महीनों में संघ प्रमुख उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में कई अहम दौरे भी कर सकते हैं। लखनऊ की यह बैठक न केवल संगठनात्मक दृष्टि से बल्कि राजनीतिक संकेतों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।









