रांची/रायपुर । झारखंड के कर्मचारी अभी पुरानी पेंशन का इंतजार कर रहे हैं, जबकि छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों की पुरानी पेंशन अप्रैल महीने से ही बहाल हो गयी। छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों की NPS की कटौती बंद हो गयी है, जबकि GPF के तहत 12 फीसदी की कटौती शुरू हो गयी है, छत्तीसगढ़ के 5 लाख कर्मचारी आज से हड़ताल पर है। प्रदेश के सभी दफ्तर आज से एक सप्ताह के लिए बंद हो गये हैं, तो वहीं शिक्षकों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान कर दिया है। नाराजगी का आलम ये है कि अधिकारी से लेकर चपरासी तक आज से हड़ताल पर चले गये हैं। आइये बताते हैं कि पुरानी पेंशन बहाली के बाद भी छत्तीसगढ़ के कर्मचारी और शिक्षक आखिर क्यों हैं नाराज?….

दरअसल, छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों को तो राज्य सरकार ने पुरानी पेंशन दे दी, लेकिन महंगाई भत्ता और HRA पर कैची चला दी। छत्तीसगढ़ के 5 लाख अधिकारी कर्मचारियों को आज भी केंद्रीय कर्मचारियों की तुलना में 12 फीसदी कम महंगाई भत्ता मिल रहा है। वहीं प्रदेश के कर्मचारियों को सालों बाद भी छठे वेतनमान के अनुरूप ही गृहभाड़ा भत्ता दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी सातवां वेतनमान के अनुरूप महंगाई भत्ता मांग रहे हैं। कई दफा के प्रदर्शन के बाद भी जब सरकार महंगाई भत्ता और HRA में बढोत्तरी को राजी नहीं हुई तो कर्मचारी और शिक्षक आज से आंदोलन पर उतर गये हैं।

छत्तीसगढ़ में सबकुछ बंद

कर्मचारी-शिक्षक हर वर्ग ने इस हड़ताल में शामिल होने का ऐलान किया है। लिहाजा, प्रदेश के हजारों स्कूलों और दफ्तरों में आज से ताला लटक गया है। दफ्तर तो पूरे सप्ताह बंद रहेंगे और 1 अगस्त से खुल जायेंगे, लेकिन स्कूलों में कब ताला खुलेगा, इसे लेकर अभी कुछ साफ नहीं है। इधर राजपत्रित अधिकारी भी इस बार हड़ताल में है। वहीं मंत्रालय, सचिवालय के साथ-साथ स्वास्थ्यकर्मी, निगमकर्मी, वाहन चालक, सफाई कर्मचारी, नर्सिंग स्टाफ, चतुर्थ वर्ग कर्मचारी, तृतीय वर्ग कर्मचारी सहित हर वर्ग के कर्मचारी आज से हड़ताल पर है। आलम ये है कि ना तो वैक्सीनेशन के लिए स्टाफ है और ना ही मौजूदा मानसून सत्र के जवाब को बनाने वाला कोई कर्मचारी। हड़ताल से पूरे छत्तीसगढ़ में हाहाकार मच गयी है।

12 फीसदी कम मिल रहा है महंगाई भत्ता

केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को अभी 34 प्रतिशत महंगाई भत्ता दे रही है, लेकिन छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों को अभी सिर्फ 22 फीसदी ही DA मिल रहा है। मतलब हर महीने छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों को 12 प्रतिशत कम महंगाई भत्ता मिल रहा है, जिससे 4000 से 16 हजार रूपये तक का नुकसान प्रतिमाह कर्मचारियों को उठाना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने पहले चरण में ज्ञापन सौंपकर अपना विरोध जताया था, लेकिन मांगें नहीं पूरी हुई। इसके बाद 29 जून को एक दिवसीय हड़ताल कर चेतावनी सरकार को दी गयी, तब भी सरकार ने बातें नहीं मानी, जिसके बाद अब तीसरा चरण आंदोलन का है, जिसमें अब कर्मचारी 5 दिन का हड़ताल कर रहे हैं।

कब-कब का DA है अभी तक बकाया

जनवरी 2020 का 4 % जुलाई 2020 के 3 % में से 1 % मिलाकर 5 % मंहगाई भत्ता 1 मई 2022 से दिया गया है। वर्तमान में जुलाई 2020 का 2 % व जनवरी 2021 से 4% तथा जुलाई 2021 से 3 % जनवरी 2022 से 3 % मिलाकर कुल 12 % मंहगाई भत्ता लंबित है और कर्मचारियों को अभी भी 6 वें वेतनमान के अनुरूप गृहभाडा़ भत्ता मिल रहा है,जिसके कारण समस्त शासकीय कर्मचारियों प्रतिमाह लगभग 4000 रूपये से 16000 रूपये की आर्थिक क्षति हो रही है।

केंद्र सरकार ने कब-कब बढ़ाया है महंगाई भत्ता

केंद्र शासन ने 1 जनवरी 2019 के 12 % महँगाई भत्ता में 5 % वृध्दि कर 1 जुलाई 2019 से 17 % घोषित किया था। लेकिन छत्तीसगढ़ में 1 जुलाई 2021 से महँगाई भत्ता में 5 % वृध्दि किया था। जिसके कारण 1 जुलाई 2019 से 30 जून 2021 तक प्रदेश के कर्मचारी अधिकारियों के मासिक वेतन में 5 % का कटौती हुआ था। केन्द्र सरकार ने 1 जनवरी 20 का 4 %,1 जुलाई 20 का 3 % तथा 1 जनवरी 21 का 3 % कुल 11 % डी ए में वृद्धि अथार्त 17% से 28 % को 1 जुलाई 21 से प्रभावशील किया था। लेकिन राज्य सरकार ने 1 जुलाई 21 से 30 अप्रैल 22 तक वेतन में 17 % कटौती कर डी ए में 5 % का वृध्दि 1 मई 22 से किया है।उन्होंने बताया कि केंद्रीय कर्मचारियों को फिलहाल 34 % डी.ए मिल रहा है जबकि राज्य में डी.ए. 22 % है।जोकि 1 मई 22 से प्रभावशील किया गया है। जिसके कारण राज्य के कर्मचारी-अधिकारी के मासिक वेतन में 12 % का कटौती हो रहा है।गृहभाड़ा भत्ता स्वीकृति के मामले में राज्य सरकार कर्मचारी-अधिकारियों का आर्थिक शोषण कर रही है। राज्य में 1/1/2016 से सातवाँ वेतनमान लागू हो गया था। लेकिन कर्मचारी-अधिकारियों को आज पर्यन्त छटवे वेतनमान के मूलवेतन पर 10 % एवं 7% के दर से एच आर ए दिया जा रहा है। केन्द्र में 18 % और 9% है।

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