Alamgir Alam Biography in Hindi: ED की सोमवार को  रांची में पड़ी दबिश के बाद अचानक से आलमगीर आलम सुर्खियों में आ गये थे। हालांकि आलमगीर आलम की गिरफ्तारी इतनी जल्दी हो जायेगी, इसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी। बुधवार की शाम मंत्री आलमगीर आलम की गिरफ्तारी के बाद हर कोई जानना चाहता है कि आखिर आलमगीर आलम है कौन? जिनकी दूसरे दौर की पूछताछ के बाद ED ने गिरफ्तारी कर ली ।

आलमगीर आलम झारखंड सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री हैं। ED जो छापेमारी कर रही है, वो झारखंड के ग्रामीण विकास मंत्रालय में टेंडर कमीशन घोटाले को लेकर कर रही है। जाहिर है जो भी कार्रवाई चल रही है, उन मामलों में आलमगीर आलम पर भी आंच आज ना कल आनी ही थी। मामले में पिछले करीब दो सालों से ED इस मामले में कार्रवाई कर रही है।

पाकुड़ से चुनाव जीतते रहे हैं आलमगीर

कांग्रेस के नेता और पाकुड़ से विधायक आलमगीर आलम झारखंड सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री हैं. ईडी की छापेमारी ग्रामीण विकास विभाग के पूर्व चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चल रही जांच के सिलसिले में की गई थी. उन्हें पिछले साल ही गिरफ्तार किया गया था.

पिछले साल से कार्रवाई में काफी तेजी आयी है। घोटाले को लेकर मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया गया था, जिसके बाद PMLA के तहत 6 ठिकानों पर छापेमारी सोमवार को की गयी। साथ ही झारखंड के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर के निजी सचिव संजीव लाल के घरेलू सहायक के परिसरों की तलाशी ली गई तो नोटों का जखीरा बरामद हुआ। देर शाम तक ही नोटों का आंकड़ा 35.23 करोड़ रुपये पहुंच गया था। नकदी में मुख्य रूप से 500-500 की गड्डियां हैं।

आलमगीर आलम का जीवन परिचय (Alamgir Alam Biography in Hindi)

आलमगीर आलम झारखंड कांग्रेस के सबसे कद्दावर नेता हैं। पाकुड़ क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले आलमगीर आलम चौथी बार पाकुड़ से विधायक बने है। सरपंच चुनाव जीतकर सक्रिय राजनीति में आये आलमगीर आलम अभी मौजूदा सरकार में संसदीय कार्य मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री हैं। इससे पहले आलमगीर आलम 20 अक्टूबर 2006 से 12 दिसंबर 2009 तक झारखंड विधानसभा अध्यक्ष भी रहे थे। पाकुड़ विधानसभा से कांग्रेस के 4 बार विधायक बने आलमगीर आलम साल 2000 में पहली बार विधायक बने थे। विरासत में राजनीति मिलने के बाद आलमगीर ने सरपंच का चुनाव जीतकर राजनीति में प्रवेश किया था।

पाकुड़ में 2005 में आलमगीर आलम विधायक चुने गए थे। उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा के अकील अख्तर को 18066 वोटों से हराया था। 2009 में झामुमो के अकील अख्तर विधायक बन गए थे, लेकिन 2014 में अचानक राजनीतिक बदलाव हो गया। कांग्रेस से विधायक रहे आलमगीर आलम ने तब झारखंड मुक्त मोर्चा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत गए थे। झारखंड में कांग्रेस में आलमगीर आलम के कद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद हाल ही में झारखंड में बनाई गई नई चंपई सौरेन की सरकार में आलमगीर आलम को डिप्टी सीएम बनाए जाने की चर्चा थी। चंपई सरकार में वो डिप्टी सीएम तो नहीं बने, लेकिन सरकार में उनकी हैसियत नंबर टू की अभी भी है।

कितनी हैं संपत्ति

52 साल के आलमगीर आलम के पास 7 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है. 2019 के चुनावी शपथपत्र में उन्होंने 39 लाख रुपये के कर्ज का भी खुलासा किया था. इससे पहले 2014 के हलफनामे के मुताबिक उनके पास 6 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति थी. उन्होंने उस समय 45 लाख रुपये के कर्ज का खुलासा 2014 के चुनावी हलफनामे में किया था. 2009 के हलफनामे के अनुसार उनके पास 1.41 करोड़ रुपये की संपत्ति थी. उस समय उनके ऊपर 2 लाख रुपये का कर्ज था. Myneta.info पर दी गई जानकारी के मुताबिक 2014 के चुनावी शपथपत्र में उन्होंने 1 आपराधिक केस का भी जिक्र किया था.

आलमगीर आलम के हैं दो बच्चे

झारखंड विधानसभा की साइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, आलमगीर आलम का जन्म 8 जनवरी 1950 को साहिबगंज के इस्लामपुर में हुआ था. उनके पिता का नाम स्वर्गीय सनाउल हक और माता का नाम स्वर्गीय अमीना खातून है. आलमगीर आलम के दो बच्चे हैं. इनमें एक बेटा और दूसरी बेटी है. झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम का पेशा बिजनेस रहा है. वह खेती से भी जुड़े हैं. उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि मध्यवर्गीय परिवार है. आलमगीर आलम की शैक्षिक योग्यता बीएससी है. आलमगीर आलम सन 2000 में विधायक बने थे. उसके बाद 2005, 2014 और 2019 में विधायक चुने गए. उन्होंने कभी भी सांसदी का चुनाव नहीं लड़ा. वह बांग्लादेश, मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर और सऊदी अरब की यात्रा कर चुके हैं.

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