विदाई हो तो ऐसी ! शिक्षक हुए रिटायर तो 9 किलोमीटर लंबी निकली शोभायात्रा, 20 गांव के लोगों ने डीजे पर किया डांस, सोना-चांदी के अलावे लाखों के गिफ्ट भी दिये

Teacher News : शिक्षक को सेवानिवृत्ति पर ऐसी विदाई मिली, कि हर कोई दंग रह गया। घोड़े पर बिठाकर 9 किलोमीटर लंबी शोभायात्र, फूलों की वर्षा, डीजे पर डांस और सम्मान स्वरूप लाखों से उपहार…यह आयोजन गुरु–शिष्य परंपरा की जीवंत मिसाल बन गया। ये अनूठा नजारा दिखा राजस्थान के पाली में, जहां रोहट क्षेत्र के भाकरीवाला गांव में एक शिक्षक के सेवानिवृत्ति दिवस को जिस तरह से छात्रों और ग्रामीणों ने मनाया, उसने यह साबित कर दिया कि सच्चा शिक्षक सिर्फ किताबें नहीं पढ़ाता, बल्कि पीढ़ियों का भविष्य गढ़ता है।

दरअसल भाकरीवाला गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ दाऊलाल सैन 31 दिसंबर को सेवा निवृत्त हुए। लेकिन यह विदाई किसी सामान्य सरकारी समारोह तक सीमित नहीं रही। गांव के लोगों और उनके सैकड़ों विद्यार्थियों ने मिलकर इसे सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता का पर्व बना दिया।

घोड़े पर बिठाकर निकाली गई 9 किलोमीटर की बिंदौरी
सेवानिवृत्ति के दिन शिक्षक दाऊलाल सैन को स्कूल परिसर से घोड़े पर ससम्मान बिठाया गया। इसके बाद डीजे की धुनों पर नाचते–गाते हुए करीब 9 किलोमीटर लंबी बिंदौरी निकाली गई, जो भाकरीवाला गांव से उनके निवास स्थान सरदारसमंद फार्म तक पहुंची।पूरे रास्ते छात्रों और ग्रामीणों ने फूल बरसाए। कहीं जेसीबी पर खड़े होकर पुष्पवर्षा की गई, तो कहीं बच्चों ने अपने प्रिय गुरु के लिए नारे लगाए। यह दृश्य किसी विवाह समारोह से कम नहीं था।

“आपने हमारे बच्चों का भविष्य संवारा”
इस आयोजन में भाकरीवाला सहित आसपास के करीब 20 गांवों के लोग शामिल हुए। प्रशासक अमराराम बेनीवाल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने शिक्षक के सम्मान में समारोह आयोजित किया।
ग्रामीणों ने कहा—“आपने हमारे बच्चों को सिर्फ पढ़ाया नहीं, बल्कि संस्कार दिए। स्कूल का विकास किया, यह सम्मान उसी का प्रतिफल है।”
सम्मान स्वरूप शिक्षक को आधा तोला सोने की अंगूठी और 11 हजार रुपये नकद भेंट किए गए।
शिक्षक भी हुए भावुक, स्कूल के लिए दिया योगदान
इस आत्मीय सम्मान से अभिभूत शिक्षक दाऊलाल सैन भी भावुक हो गए। उन्होंने मंच से घोषणा की कि वे स्कूल विकास के लिए 51 हजार रुपये अपनी ओर से भेंट करेंगे।
उन्होंने बताया कि वे अविवाहित हैं और 28 मार्च 1992 को सरकारी सेवा में आए थे। वर्ष 2013 से वे भाकरीवाला गांव में सेवाएं दे रहे थे और 11वीं–12वीं के विद्यार्थियों को इतिहास पढ़ाते थे।

शिक्षा के मंदिर को संवारा, अपनी जेब से खर्च किए लाखों
वर्ष 2018 में जब उन्होंने स्कूल भवन की जर्जर स्थिति देखी, तो उन्होंने अपनी जेब से एक लाख रुपये लगाकर मरम्मत कार्य शुरू करवाया। साथ ही भामाशाहों को प्रेरित कर करीब 38 लाख रुपये जुटाए, जिससे स्कूल का कायाकल्प संभव हो सका। सेवानिवृत्ति के समय वे विद्यालय में उप प्राचार्य (वाइस प्रिंसिपल) के पद पर थे।

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