मौत से पहले क्या थे कैप्टन शांभवी के आखिरी वर्ड…. अपनी दादी को भेजा था लास्ट मैसेज, “हाय ददा… गुड मॉर्निंग” पिता उड़ाते हैं फाइटर प्लेन

What were Captain Shambhavi's last words before her death? The last message she sent to her grandmother was, "Hi Dada... Good morning." Her father flies fighter planes.

Pilot Sambhwi Last Word: महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार की प्लेन क्रैश में मौत हो गयी। हादसे में उनके साथ मौजूद PSO एचसी विदिप जाधव, पायलट कैप्टन सुमित कपूर, कैप्टन सांभवी पाठक और फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली की भी जान चली गई। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक क्रैश से पहले प्लेन के चीफ पायलट सुमित कपूर ने मेडे कॉल नहीं किया था।

शांभवी के लास्ट वर्ड थे ओह शिट….

हालांकि विमान की स्थिति देख हादसे का अहसास शांभवी को हो गया था। कॉकपीट में मौजदू कैप्टन शांभवी पाठक के लास्ट शब्द थे- ओह शिट…ओह शिट। उसके बाद धमाके और आग की आगोश में सब कुछ तबाह हो गया।

चश्मदीदों की मानें तो जिस रफ्तार में हेलीकाप्टर तेजी से नीचे आ रहा है, उसे देखकर लग गया था कि प्लेन दुर्घटनाग्रस्त होगा। गांववालों ने बताया कि प्लेन रनवे के पास पहुंचने से लगभग 100 मीटर पहले ही क्रैश हो गया।

गांव में ही गिर जाता प्लेन

जब प्लेन नीचे उतर रहा था, तभी लग रहा था कि हादसा होगा और ऐसा ही हुआ। हालांकि ये आशंका थी कि गांव में ही हेलीकाप्टर गिर जायेगा,लेकिन किसी तरह से पायलट गांव से बाहर लाने में सफल रहे, लेकिन गांव से बाहर आते ही प्लेन नीचे गिर गया।

बताया जा रहा है कि दो बार लैंडिंग की कोशिश की गयी थी। सुबह कोहरे के कारण विजिबिलिटी कम थी। पायलटों ने बारामती एयरपोर्ट के रनवे-11 पर लैंडिंग की कोशिश की। हालांकि उन्हें रनवे नहीं दिखा।

पायलट ने बताया रनवे दिख रहा
दोनों पायलट ने प्लेन दोबारा ऊपर ले लिया। दूसरी बार विमान ने फिर से रनवे की ओर आना शुरू किया। पायलट ने बताया कि अब रनवे दिख रहा है। इसके बाद विमान को लैंडिंग की अनुमति दे दी गई, लेकिन अहम बात यह रही कि पायलट ने इस अनुमति की रीडबैक नहीं दी, यानी लैंडिंग क्लीयरेंस को दोहराकर कन्फर्म नहीं किया।

विमान ने अपनी लोकेशन और स्पीड बताने वाले सिग्नल भेजना बंद कर दिया। जमीन छूने से पहले ही प्लेन पलटकर और रनवे से 100 मीटर पहले ही जमीन से टकरा गया।

शांभवी पाठक थी चार्टर प्लेन की पायलट
शांभवी पाठक एक वीआईपी चार्टर प्लेन की पायलट थीं और पेशेवर उड़ानों में अपनी दक्षता के लिए जानी जाती थीं। हादसे के बाद जब यह स्पष्ट हुआ कि विमान की कमान शांभवी के हाथों में थी, तो ग्वालियर के लोग स्तब्ध रह गए।

शांभवी के माता-पिता वर्तमान में दिल्ली में रहते हैं। उनके पिता विक्रम पाठक भारतीय वायुसेना (इंडियन एयर फोर्स) में अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जबकि माता रौली पाठक गृहिणी हैं। शांभवी का एक छोटा भाई भी है। परिवार की जड़ें ग्वालियर से जुड़ी हुई हैं और उनकी प्रारंभिक शिक्षा भी यहीं हुई थी।

ग्वालियर से था परिवार का वास्ता
ग्वालियर के वसंत विहार क्षेत्र के डी-61 में शांभवी की दादी मीरा पाठक रहती हैं। दादी के अनुसार, हादसे वाले दिन सुबह करीब 6 बजकर 40 मिनट पर शांभवी का आखिरी मैसेज आया था, जिसमें उसने केवल “गुड मॉर्निंग” लिखा था।

दादी का कहना है कि शांभवी आमतौर पर ऐसे छोटे संदेश नहीं भेजती थी, लेकिन उस सुबह आया यह मैसेज अब उनकी आखिरी याद बन गया है। कुछ समय बाद जब परिवार को शांभवी के निधन की सूचना मिली, तो दादी मीरा पाठक का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

इंजीनयरिंग के बाद पायलट बनी शांभवी
परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों ने बताया कि शांभवी बचपन से ही बेहद होनहार और मेहनती थीं। शुरुआत में उनका चयन इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए हुआ था और वे इंजीनियर बनना चाहती थीं।

हालांकि, पढ़ाई के दौरान उनका मन बदला और उन्होंने पायलट बनने का कठिन फैसला लिया। इसके बाद उन्होंने कड़ी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के साथ उड़ान प्रशिक्षण पूरा किया और एक सफल पायलट के रूप में अपनी पहचान बनाई। वीआईपी चार्टर फ्लाइट की पायलट बनना उनके करियर की बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी।

शांभवी को प्यार से चीनी बुलाते थे
घर में शांभवी को प्यार से “चीनी” कहा जाता था। वह अपनी दादी से बेहद जुड़ी हुई थीं और उन्हें प्यार से “दादू” कहकर बुलाती थीं। परिवार के अनुसार, शांभवी अक्सर वीआईपी यात्रियों के साथ उड़ान भरती थीं और अपने पेशे को लेकर बेहद गंभीर और जिम्मेदार थीं।

रिश्तेदार अजय तिवारी ने बताया कि शांभवी बेहद मिलनसार स्वभाव की थीं और हर किसी से स्नेह से बात करती थीं। उनके असमय निधन से पूरा परिवार गहरे सदमे में है।

सुबह में की थी दादी को मैसेज

वहीं, मीरा पाठक ने कहा कि वह हमसे फोन पर ही बात करती थी। बहुत दिनों बाद उसके आज सुबह में हाय ददा… गुड मॉर्निंग का मैसेज आया था। मैंने फोन उठाया तो देखा कि उसका मैसेज आया है। शांभवी के पिता भी एयरफोर्स में स्क्वाड्रन लीडर हैं। वह मीराज उड़ाते थे।

एयर चीफ के साथ वह रहते थे। पहले ग्वालियर एयरबेस पर ही पोस्टेड थे। शांभवी ने यही रहने के दौरान फाइलट उड़ाने की ट्रेनिंग ली थी। शांभवी पाठक के दादा भी एयर फोर्स में ही थे। वह ग्राउंड स्टाफ थे। पिछले साल उनका निधन हुआ है। उसमें शांभवी ग्वालियर आई थी।

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