पुतिन की गुप्त भारत यात्रा! क्या होने जा रहा है S-500 का सबसे बड़ा सौदा? तेल, मिसाइल और सुपर-डिफेंस तकनीक पर टिकीं दुनिया की नज़रें…

नई दिल्ली: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर 2025 को दिल्ली आ रहे हैं—लेकिन यह केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि वह बैठक है जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद यह पुतिन की पहली भारत यात्रा होगी, जिसने वैश्विक शक्ति संतुलन, हथियारों की सप्लाई चेन और ऊर्जा बाज़ारों को पूरी तरह बदल दिया है।

भारत और रूस के बीच यह समिट ऐसे समय में हो रही है जब भारत अपनी रक्षा खरीद रणनीति में बड़ा बदलाव कर चुका है, लेकिन तेल व्यापार ने दोनों देशों के रिश्ते को पहले से भी मजबूत कर दिया है। यही वजह है कि यह यात्रा सिर्फ कूटनीति नहीं—एक बड़े भू-राजनीतिक मोड़ के रूप में देखी जा रही है।

 S-500 को लेकर क्या होने वाला है फैसला?

दोनों देशों की बैठकों में सबसे ज्यादा फोकस जिस डील पर है, वह है अगली पीढ़ी की मिसाइल डिफेंस प्रणाली—रूस की S-500 प्रणाली
सूत्रों का मानना है कि अगर इस समिट में S-500 पर सहमति बनती है, तो यह संकेत होगा कि मिसाइल डिफेंस के क्षेत्र में रूस अभी भी भारत का प्राथमिक पार्टनर है।

गौरतलब है कि भारत ने हाल ही में पाकिस्तान के ड्रोन खतरे के दौरान ऑपरेशन सिंदूर में S-400 सिस्टम का प्रभावी उपयोग किया था।

 रूस—क्यों अब भी जरूरी?

भले ही भारत के रक्षा आयात में रूस की हिस्सेदारी 20 साल में 89% से घटकर अब 36% रह गई है, फिर भी रूस का महत्व खत्म नहीं होता। वजहें साफ हैं—

  • सोवियत हथियार प्रणालियों की रिपेयर रूस से ही होती है

  • परमाणु पनडुब्बी और हाई-एंड एयर-डिफेंस सिर्फ कुछ ही देश देते हैं

  • हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक में रूस अब भी पश्चिम से आगे

 भारत की नई रणनीति—अब सिर्फ हथियार नहीं, टेक्नोलॉजी भी चाहिए

भारत अब लड़ाकू विमान खरीदने से ज्यादा फोकस कर रहा है—

  • एयर-डिफेंस

  • मिसाइलें

  • नौसेना प्लेटफॉर्म

  • बख्तरबंद वाहन

  • ज्वाइंट प्रोडक्शन + टेक्नोलॉजी ट्रांसफर

ये बदलाव इसलिए हुए क्योंकि:
1️⃣ यूक्रेन युद्ध में रूस से सप्लाई रुकना बड़ा सबक था।
2️⃣ आत्मनिर्भर भारत के तहत AK-203, ब्रह्मोस जैसी रूसी प्रणालियों का स्थानीय उत्पादन बढ़ रहा है।

 रक्षा कमज़ोर हुई तो तेल ने रिश्ता और मजबूत किया

रूस से रक्षा आयात घटा, लेकिन ऊर्जा व्यापार ने दोनों देशों को पहले से ज्यादा जोड़ दिया।
2022 के बाद रूस भारत को सस्ते दामों पर तेल देने लगा और भारत ने इसका पूरा लाभ उठाया।

रूस से भारत का आयात:

  • 2020-21: 1.4%

  • 2022-23: 6.5%

  • 2024-25: लगभग 9%

  • वर्तमान: 8.6%

लेकिन भारत का रूस को निर्यात सिर्फ 1% के आसपास, जिससे व्यापार संतुलन रूस के पक्ष में है।

 पुतिन की यात्रा में क्या-क्या दांव पर लगा है?

1. S-500 सुपर-डिफेंस डील

अगर इस पर सहमति बनती है तो दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था बदल जाएगी।

2. हाई-एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर

भारत मिसाइल, पनडुब्बी और एयरोस्पेस में गहरी साझेदारी चाहता है।

3. लंबी अवधि का तेल समझौता

भारत स्थिर, सस्ती और लगातार सप्लाई सुरक्षित करना चाहता है—रूस इसके लिए तैयार दिखाई देता है।

 इस समिट की असली अहमियत क्या है?

यह बैठक सिर्फ दो देशों की मुलाकात नहीं—बल्कि यह तय करेगी कि बदलते विश्व क्रम में भारत रूस के साथ अपने संबंधों को कैसे नया स्वरूप देता है।
जब भारत अमेरिका, फ्रांस, जापान के साथ गठबंधन मजबूत कर रहा है, तब यह देखना अहम होगा कि क्या रूस के साथ की साझेदारी भी आधुनिक रूप में ढल पाती है या नहीं।

पुतिन की यह यात्रा तय कर देगी—
भारत और रूस 21वीं सदी की नई रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं, या पुराना मॉडल खत्म होने लगा है।

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