हर घर पानी या बड़ा खेल? 8.69 लाख करोड़ की योजना… 2028 तक हर गांव में नल का वादा, सच या सियासी दांव!
सरकार का मेगा प्लान लॉन्च—हर घर तक पानी पहुंचाने का दावा, लेकिन क्या इस बार पूरा होगा सपना या फिर अधूरा रह जाएगा?

भोपाल: देश में हर घर तक नल से पानी पहुंचाने को लेकर एक बार फिर बड़ा ऐलान किया गया है। नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन की अवधि बढ़ाकर दिसंबर 2028 तक करने और इसे नए स्वरूप “जल जीवन मिशन 2.0” के रूप में लागू करने को मंजूरी दे दी है।
इस योजना के लिए अब कुल बजट बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिसने इसे देश की सबसे बड़ी बुनियादी योजनाओं में शामिल कर दिया है।
करोड़ों नहीं… लाखों करोड़ का दांव!
नई योजना के तहत केंद्र सरकार करीब 3.59 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसका उद्देश्य सिर्फ पाइपलाइन बिछाना नहीं, बल्कि एक टिकाऊ और पारदर्शी जल आपूर्ति प्रणाली तैयार करना है, जिससे हर ग्रामीण परिवार तक साफ और सुरक्षित पानी पहुंच सके।
मध्यप्रदेश सरकार ने भी इस मिशन के तहत केंद्र के जल शक्ति मंत्रालय के साथ एमओयू साइन कर लिया है, जिससे राज्य में तेजी से काम शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
पाइपलाइन से लेकर गांव-गांव तक पानी का वादा
इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में व्यापक स्तर पर पाइपलाइन बिछाई जाएगी और संपूर्ण पेयजल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा।
इस मौके पर सी. आर. पाटिल, वी. सोमन्ना और सम्पतिया उइके सहित कई बड़े नेता मौजूद रहे।
वहीं मोहन यादव ने इसे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए “ऐतिहासिक कदम” बताया है।
जागरूकता से लेकर जल सुरक्षा तक फोकस
प्रदेश में ‘हर घर जल’ अभियान के तहत ग्राम पंचायतों को भी इस मिशन में सक्रिय भूमिका दी जा रही है।
इसके साथ ही ‘जल अर्पण’ और ‘जल महोत्सव’ जैसे अभियानों के जरिए लोगों को जल संरक्षण और गुणवत्ता के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल—क्या इस बार हर घर तक पहुंचेगा पानी?
सरकार का दावा है कि दिसंबर 2028 तक हर ग्रामीण परिवार को नियमित और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह मेगा योजना वाकई जमीन पर उतरेगी या फिर पहले की योजनाओं की तरह कागजों में ही सीमित रह जाएगी?
फिलहाल, देशभर की नजर इस पर टिकी है—क्योंकि यह योजना सिर्फ पानी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जिंदगी बदलने का वादा करती है।









