जहानाबाद। एक त्रेता में श्रवण कुमार हुए थे, जो अपने अंधे मां-पिता को लेकर तीर्थाटन पर निकले थे…लेकिन रास्ते में राजा दशरथ के बाण लगने से उनकी मृत्यु हो गयी। किताबों और दादी-नानी  के किस्सों में हमने ये बातें खूब सुनी है, लेकिन आज आपको कलियुग में श्रवण कुमार की कहानी बता रहे हैं। जो अपने बुजुर्ग मां-पिता को बहंगी में देवघर बाबाधाम के दर्शन कराने निकले हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि कलियुग के श्रवण के इस पुण्य काम में उनकी पत्नी और दोनों बच्चे भी भागीदार हैं। जिस भी रास्ते से ये बेटे बहू अपने कंधे पर बहंगी में सास-ससुर को बैठाकर निकलते हैं लोगों की कतार लग जाती है।

कलियुग के इस श्रवण कुमार का नाम चंदन है, जो अपनी पत्नी रानी के साथ जहानाबाद के थाना घोषी के बीरपुर से बाबाधाम के सफर पर निकले हैं। रविवार को सुल्तानगंज से जल भरकर पति-पत्नी बुजूर्ग को लेकर देवघर के लिए रवाना हुए। 105 किलोमीटर का ये सफर चंदन और उसकी पत्नी रानी इसी तरह सास-ससुर को बहंगी में बैठाकर तय करेंगे। चंदन ने बताया कि पहले वो सिर्फ अकेले ही मां-पिता के लेकर बहंगी में चलना चाह रहे थे, लेकिन पत्नी रानी को जब ये मालूम चला तो वो भी इसमें भागीदार बन गयी। और फिर बहंगी तैयार कर हम दोनों पति-पत्नी अपने मां-पिता को देवघर की यात्रा पर निकले हैं।

चंदन के मुताबिक उनका पूरा परिवार काफी धार्मिक है। हर महीने उनके घर में सत्यनारायण भगवान की कथा होती है। वो कहते हैं कि यात्रा लंबा है, लेकिन इस यात्रा को वो जरूर पूरा करेंगे। पत्नी रानी भी कहती है कि उन्हें खुशी है कि सास-ससुर को बाबाधाम की यात्रा कराने निकले हैं। चंदन की मां मीना और पिता जग्रन्नाथ कहते हैं कि अपने बेटे बहू के इस मेहनत से उनके पास अब बोलने के लिए कुछ नहीं है। वो बहुत खुश हैं।   

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