धमतरी । बंदर के हाथ में नारियल….बंदर के हाथ में अस्तुरा….! ऐसी कई कहावतें तो आपने सुनी होगी, लेकिन इस बार ये कहावत थोड़ी उससे अलग है  “बंदर के गले में लोटा” । सुनकर हंसी आ रही होगी, लेकिन ये हकीकत है। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक बंदर को शरारत इतनी भारी पड़ी की, उसकी जान जाते-जाते बची। दरअसल हुआ यूं कि धमतरी में एक इलाका है नगरी। नगरी के एक मंदिर के पास बंदर खूब उछलकूद करते हैं। इसी दौरान भगवान शिव पर जल चढ़ाने वाला “लोटा” बंदर  के बच्चे के सर में अटक गया। सर में अटका भी ऐसा कि, फिर निकला ही नहीं। इधर बच्चे के सर पर लोटा फंसा देख बंदरिया भी परेशान। बेजुबान को जितनी समझ आया, अपनी समझदारी से बंदर ने लोटा निकालने की कोशिश की, लेकिन बंदर के बच्चे के सर से लोटा टस से मस नहीं हुआ। पूरा मामला नगरी डिपो के काष्ठगार का है, जहां एक शिव मंदर है। बंदरों की संख्या उस इलाके में काफी ज्यादा है, जो वहां उछलकूद करते रहते हैं। इसी दौरान बंदर के बच्चे के गर्दन में जल अर्पित करने वाला पात्र अटक गया। स्थानीय लोगों ने भी तरह-तरह से जुगत भिड़ाकर बर्तन को सर से निकालने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। इधर बंदर की मां कंधे में बच्चे को चिपकाये इधर-उधर भटकती रही। इस मामले में जब धमतरी के वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों को सूचना दी। लेकिन, अधिकारियों का रूख बेहद सुस्त वाला रहा। घटना के तीन दिन बाद भी बंदर की जान बचाने के लिए वन विभाग ने पहल नहीं की। लोग आशंका जता रहे हैं कि बर्तन में पानी के लालच में बंदर ने उसमें मंह डाला होगा, जो उसमें फंस गया। 72 से 96 घंटे तक बर्तन बंदर के बच्चे के गले में ही फंसा रहा, इधर बर्तन की वजह से बंदर के बच्चे की हालत खराब होती जा रही थी. ना तो खा पा रहा था और ना ही सांस ले पा रहा था। आज सुबह बेसुध बंदर के बच्चे के सर से अचानक खुद ही लोटा निकल गया। फिलहाल बंदर के बच्चे की स्थिति ठीक है। इधर बर्तन निकल जाने के बाद सभी लोगों ने राहत की सांस ली है।

 

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