“…इ सब कहलो की, इतना मेहनत किये हैं…1300 रूपये दो…पैइसा ले लेलको और चइल गेलो….” गोबिंदपुर के सरकारी अस्पताल में इन दिनों स्वास्थ्यकर्मी रक्त पिशाच बन गये हैं। ना आंखों में शर्म और ना ही हया…इस अस्पताल में पदस्थ स्वास्थ्यकर्मी मरीज को इंसान नहीं, बल्कि ATM मशीन समझते हैं। प्रसव के लिए भर्ती होने आयी गर्भवती महिलाओं को देख इस अस्पतान की नर्सें तो मानों इस तरह भूखे भेड़ियों की तरह टूटती है, मानों सबसे पसंदीदा निवाला मिल गया हो। जो गर्भवती दो जून की रोटी भी किसी तरह जुगाड़ पाती है, वैसी भूखी- लाचार महिलाओं को भी यहां की नर्सें 1000-2000 रूपये रिश्वत खा जाती है। हैरानी की बात ये है स्वास्थ्यकर्मियों की ऐसी घिनौनी करतूत पर यहां के डाक्टरों की मौन सहमति होती है।

पिछले दिनों इस शर्मनाक करतूत से खुद सिविल सर्जन को भी दो चार होना पड़ गया। सिविल सर्जन शिकायतों को लेकर जब गोबिंदपुर से स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, तो भर्ती महिलाओं ने नर्सों की पोल खोल दी। नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों की करतूत ने खुद सिविल सर्जन को भी हैरान कर दिया। इस अस्पताल में अंधेरगर्दी इस कदर मची है कि सरकार के नियम प्रावधान को ठेगा दिखाकर मरीजों को खान भी नहीं दिया जाता। जबकि सरकार की तरफ से मरीजों को पौष्टिक खाने के लिए प्रर्याप्त फंड उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में इन मरीजों का निवाला कौन खा जाता है? ये एक बड़ा सवाल बन गया है।

पिछले दिनों एक वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हुआ। वीडियो में सिविल सर्जन निरीक्षण करने पहुंचे हैं, जो भर्ती मरीजों से पूछ रहे हैं कि यहां भर्ती होने पर आपका कितना पैसा खर्च हुआ। जवाब मरीजों ने बताया कि दो से तीन हजार रूपये की दवा नर्सों ने बाहर से मंगलवाया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम के पैरों तले जमीन तो तब खिसक गयी, जब मरीज के परिजनों ने ये कह दिया कि हर भर्ती मरीज से नर्स ने 1300-1300 रूपये रिश्वत ली है।

मोटी-मोटी तनख्वाह पाने वाली ये नर्से और स्वास्थ्यकर्मी इस बेहयाई पर उतारू है कि किसी तरह से अपना परिवार पालने वाली गरीब व निसहाय महिलाओं से 1300-1500 रूपये वसूल कर लेती है। कमाल की बात ये है कि ये वीडियो करीब चार से पांच दिन पुराना है, लेकिन आरोपी नर्स को सिर्फ नोटिस जारी कर विभाग ने चुप्पी साध ली है। जबकि खुद जांच केलिए पहुंचे अधिकारी ने दावा किया था कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई होगी।

गोबिंदपुर अस्पताल पहले से ही ऐसे भ्रष्ट स्वास्थ्यकर्मियों और नर्स की वजह से बदनाम रहा है। सरकारी अस्पताल में यहां की नर्स और स्वास्थ्यकर्मी मरीजों को प्रोटेक्शन मनी वसूलते हैं। जो मरीज पैसा दिया उसका इलाज होता है, पैसे नहीं देने मरीजों के साथ जानवरों से भी बुरा सलूक किया जाता है। पिछले दिनों एक महिला अस्पताल के बाहर जमीन पर बच्चे को जन्म देने को मजबूर हुई थी, इस शर्मनाक घटना में मासूम की मौत हो गयी थी।

इस घटना में भी जांच के नाम पर लीपापोती कर दी गयी, अगर ऐसे मामलों पर स्वास्थ्यकर्मियो और नर्सों पर उसी वक्त विभाग की तरफ से कड़ी कार्रवाई होती, तो इनकी हिमाकत नहीं होती कि किसी गरीब और असहाय महिला का इस तरह से शोषण करे। ऐसे में देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग को कलंकित करने और स्वास्थ्य के सेवा भाव पेशे को बदनाम करने वाले इन स्वास्थ्यकर्मियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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